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अंक विद्या - भाग ४

Updated: Aug 29, 2023

मूलांक - जन्म तारीख से भविष्य निर्धारण


आप सबने दीपावली पर्व अच्छे से मनाया होगा और सदगुरुदेव प्रदत्त उन प्रयोगों को किया ही होगा जो ब्लॉग अथवा गुरुधाम अथवा पत्रिका के माध्यम से हमको प्राप्त होते हैं । आशा करता हूं कि आपको उन सभी प्रयोगों में सफलता मिले ही ।


आपमें से बहुत से भाइयों ने पंद्रह का यंत्र अपने घर के मुख्य द्वार पर बनाया है और साथ ही इन यंत्रों को भोजपत्र पर भी तैयार किया है । मुझे इस बात की बहुत खुशी है कि इन सबने सदगुरुदेव के दिये हुये ज्ञान के महत्व को समझा है ।


हालांकि जो लोग किसी वजह से पंद्रह का यंत्र नहीं बना पाये हैं, उनके लिए एक अच्छी खबर है । आपने अंक विद्या के भाग 2 वाली पोस्ट में पढ़ा ही होगा कि सोने की कलम से केसर द्वारा कागज पर यह यंत्र अंकित कर फ्रेम में मढ़वाकर पूजा स्थान में रख दिया जाए तो, उसके जीवन में किसी प्रकार का कोई अभाव नहीं रहता । इस दीपावली पर भी हमने स्वर्ण कलम से कई यंत्र तैयार किये थे और आवश्यकतानुसार उनको गुरुभाइयों को दिया भी था ।

(पंद्रह का यंत्र)


अगर आप चाहते हैं कि आप भी अपने घर में स्वर्ण कलम से अंकित पंद्रह का यंत्र अपने पूजन स्थान में स्थापित करें तो आप हमें फोन# 8979480617 पर अपना पता भेज सकते हैं । शुभ मुहुर्त में पंद्रह का यंत्र तैयार करके हम आपको कूरियर से भेज देंगे । यंत्र को चूंकि कागज पर ही बनाना है इसलिए यंत्र निःशुल्क है । लेकिन आपको कूरियर का खर्च अवश्य देना चाहिए । कूरियर का खर्च मात्र रु १०० रखा गया है । आप Google Pay अथवा Phone Pe के माध्यम से #8979480617 पर कूरियर का पेमेंट कर सकते हैं ।


हालांकि जो गुरुभाई रु १०० का कूरियर का खर्च वहन करने में असमर्थ हैं लेकिन अपने जीवन से अभावों को दूर करना चाहते हैं, उनको भी चिंता करने की आवश्यकता नहीं है । उनका खर्च सदगुरुदेव की कृपा से हम ही वहन करेंगे ।


 

आज अंक विद्या के अगले भाग में आपको एक बहुत ही महत्वपूर्ण लेकिन आसान सी युक्ति बताने का प्रयास किया जा रहा है । अक्सर हम लोगों को एक विचित्र से प्रश्न से जूझना पड़ता ही है कि बहुत से लोग होते हैं जो आपकी बात आसानी से समझ जाते हैं, आपसे प्रेम करते हैं, आपके साथ व्यापार करने में रुचि रखते हैं, आपके प्रति वफादार होते हैं जबकि, कुछ लोग ऐसे होते हैं जो आपकी बात को समझने का प्रयास ही नहीं करते हैं अथवा हमेशा आलोचना ही करते रहते हैं और, कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जिनको आप अपनी जिंदगी में लाना चाहते हैं पर बहुत प्रयासों के बाद भी ऐसा संभव नहीं हो पाता ।


अब इस तरह की परिस्थिति व्यापार में भी हो सकती है, घर-परिवार में भी हो सकती है, मित्रगणों में भी हो सकती है और प्रेम संबंधों को लेकर भी । परिस्थिति चाहे जो भी हो, ज्योतिष में उस प्रश्न का समाधान अवश्य मिल जाता है । सदगुरुदेव ने बहुत से गूढ़ रहस्यों को बहुत आसानी से समझाया था । इससे आपको अपने व्यापार में सहयोगी चुनने में आसानी होगी, अपने मित्र गणों का चुनाव करने में आसानी होगी या व्यावहारिक संबंधों में भी आपको यह तय करने में आसानी होगी कि इन संबंधों में आप कितनी ऊर्जा और समय लगाना चाहेंगे ।


इसके लिए आपको मूलांक को समझना पड़ेगा । दरअसल २ तरह के शब्द होते हैं - मूलांक और भाग्यांक । आज यहां हम केवल मूलांक की चर्चा करेंगे । भाग्यांक से संबंधित जानकारी किसी और पोस्ट में दी जाएगी ।


मान लीजिए कि आपका जन्म किसी भी महीने की २५ तारीख को हुआ है तो इसका मूलांक निकालने के लिए हम दोनों अंकों को आपस में जोड़ देंगे -


२ + ५ = ७


अतः आपका मूलांक ७ होगा ।


भारतीय ज्योतिष में मूल रुप से ९ ग्रहों को ही प्रधानता दी गयी है । अतः अंक विद्या में भी प्रथम ९ अंकों की ही प्रधानता मानी जाती है । इसके पश्चात के अंक संयुक्त संख्या के रुप में जाने जाते हैं । १ से ९ तक के अंक मूलांक कहे जाते हैं । दस और उसके बाद की संख्या को जोड़कर उसके मूलांक बनाये जाते हैं । चूंकि किसी भी अंग्रेजी महीने में ३१ से ज्यादा दिन नहीं होते हैं और किसी भी व्यक्ति का जन्म अंग्रेजी महीने के १ से ३१ तारीख के बीच ही हो सकता है अतः ३१ की संख्या तक के मूलांक स्पष्ट किये जा रहे हैं -


मूलांक


१ = १

२ = २

३ = ३

४ = ४

५ = ५

६ = ६

७ = ७

८ = ८

९ = ९

१० = १ + ० = १

११ = २

१२ = ३

१३ = ४

१४ = ५

१५ = ६

१६ = ७

१७ = ८

१८ = ९

१९ = १ + ९ = १० = १ + ० = १

२० = २

२१ = ३

२२ = ४

२३ = ५

२४ = ६

२५ = ७

२६ = ८

२७ = ९

२८ = २ + ८ = १० = १ + ० = १

२९ = २

३० = ३

३१ = ४


इस प्रकार आप केवल अपनी जन्म तारीख के माध्यम से सहज ही अपना मूलांक ज्ञात कर सकते हैं ।


इन मूलांकों का संबंध ग्रहों से भी होता है और, इन ग्रहों का हमारे ऊपर किस प्रकार प्रभाव पड़ता है वह अगले अंकों में बताया जाएगा लेकिन, यहां हम मूलांकों का आपस में संबंध जानने का प्रयास करेंगे । यही वह चाबी है जिससे हम जान सकते हैं कि कौन व्यक्ति हमारे लिए मित्र बन सकेगा, कौन हमारा शत्रु रहेगा और कौन हमारे लिए सम रहेगा ।



कई बार ऐसा भी होता है कि कोई मूलांक आपका न तो मित्र है, न शत्रु है और न ही सम है । उस स्थिति में ये समझना चाहिए कि आप जैसा उसके लिए हैं, वह भी आपके साथ वैसा ही व्यवहार करेगा । एक परिवार के भीतर भी ऐसा हो सकता है कि दो भिन्न मूलांक के भाइयों के मूलांक का आपस में कोई संबंध ही नहीं है । उस स्थिति में आप दो प्रकार से इन संबंधों को समझ सकते हैं -

  1. मूलांक टेबल से इन दोनों व्यक्तियों के परस्पर मित्र, शत्रु और सम मूलांकों का आपस में संबंध समझ सकते हैं । इससे आपको ये भी समझने में मदद मिलेगी कि आखिर आप दोनों के विचार एक - दूसरे के क्यों नहीं मिलते हैं । और अगर मिलते भी हैं तो उनका स्तर क्या है ।

  2. अष्टक वर्ग से भी इस बात को समझा जा सकता है । अष्टक वर्ग में मंगल में प्राप्त शुभ रेखायें भी आपको बता सकती हैं कि परिवार में 2 भाइयों का संबंध इस वर्ष या किसी नियत वर्ष में कैसा रहने वाला है ।

इस प्रकार से हम अपने व्यावहारिक जीवन में अपने मित्र और शत्रुओं का भली-भांति ज्ञान कर सकते हैं । इस प्रकार की गणना करने का उद्देश्य कदापि ये नहीं होता है कि आप कहीं जाकर उथल-पुथल मचा दें लेकिन आप सचेत अवश्य हो सकते हैं ।


अंग्रेजी में एक चीज कही जाती है Informed Approach, बस ये भी कुछ - कुछ वैसा ही है । ज्योतिष आपको विभिन्न तरीकों से अपने आस-पास के परिवेश को समझने में मदद करती है । इस प्रकार आप अपनी ऊर्जा और समय दोनों का ही समुचित उपयोग कर सकते हैं । आप भी इन चीजों को समझने का प्रयास कीजिए और अपने विवेक के आधार पर निर्णय लीजिए ।


आप सब अपने जीवन में परिस्थितियों को और बेहतर तरीके से समझे सकें और विवेकानुसार निर्णय ले सकें, ऐसी ही शुभेच्छा है ।


अस्तु ।

 

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