सदगुरु कृपा विशेषांक (चिंता निवारण विशेषांक) - भाग २
Updated: Aug 5, 2025
पिछले अंक में हमने इस बात को समझने का प्रयास किया था कि किस प्रकार एक क्षण मात्र के निर्णय का हमारे जीवन पर दूरगामी असर पड़ता है । उसी प्रकार से इस अंक में हम उन दो महत्वपूर्ण तथ्यों को समझने का प्रयास करेंगे जो प्रारब्ध वश होने वाली घटनाओं के परिणाम को विपरीत होने से बचाने में हमारी मदद कर सकते हैं -
कीमत का भुगतान
इष्ट - स्थापन
महाभारत में एक कथा का वर्णन आता है जब दुर्योधन ने अपने छल भरे प्रेम का दिखावा करके महर्षि दुर्वासा को वनवासी पाण्डवों के यहां भोजन करने भेज दिया । महर्षि दुर्वासा तो सब जानते थे, फिर भी वह परीक्षा लेने के लिए वनवास कर रहे पाण्डवों के यहां भोजन को आते हैं और वह भी अपने दस हजार शिष्यों के साथ । यहां उन्होंने भोजन करने की इच्छा जताई ।

