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सभी सामग्री (माला और भोजपत्र को छोड़कर) बाजोट पर पर बिछे वस्त्र में बांधकर सदगुरुदेव से पूर्ण सफलता की प्रार्थना करते हुए किसी वीरान स्थान में रख दें और फर्श को धो या पोंछ लें...हां, याद रखिये, मैथुन चक्र, मात्र पहले दिन ही भूमि और पात्र में बनेगा, उसे नित्य बनाने की जरूरत नहीं है । भोजपत्र को स्वच्छ जल में विसर्जित कर दें ।
Jb samagri veeran sthan me chodni hai to kya tambe ki plate jisme maithun chakra bnaya hai use bhi chhodke ana hai? Or mala sumeru me Shakti sthapna kaise kren... Kripya jankari den

आपने जो प्रश्न पूछा है उसके लिए - नौकरी की अपेक्षा स्वतंत्र व्यवसाय या व्यापार अनुकूल रहेगा । दरअसल आपके तीसरे भाव में सूर्य विराजमान है जिसकी वजह से आपके अंदर पराक्रम और हिम्मत का लेवल बहुत ज्यादा है । झुकना आपके स्वभाव में न हो सकेगा जो नौकरी के लिए एक आवश्यक गुण है । इसलिए व्यापार करें ताकि आप अपनी ऊर्जा का पूरा उपयोग कर सकें लेकिन, जो भी कार्य करें, उसमें कल्पना और वास्तविकता का मिश्रण हो ।
अगर आप राजनीति में हाथ आजमायेंगे तो सफलता मिल सकती है । भाईयों से सहयोग की आशा न करें और जो भी करें, अपने दम पर ही करें ।
मन में बहुत कन्फ्यूजन है तो उसके लिए आपको साधनायें करनी चाहिए ताकि आपको आत्मबल प्राप्त हो सके । जीवन में जब समस्यायें आती हैं तो बुद्धि का प्रयोग करने के साथ - साथ दैव बल का भी प्रयोग करना चाहिए । हालांकि ये केवल मेरी राय है, आप जैसा उचित समझें, वैसे ही करें ।
वैसे, बेहतर होगा कि आप अपनी कुंडली का अष्टक वर्ग ज्योतिष के हिसाब से विश्लेषण करवायें ताकि पूरी गणना की जा सके और आपको आपकी कुंडली से जुड़ी हुयी साधनायें बतायी जा सकें जिनके माध्यम से आप जीवन में सफलता प्राप्त कर सकें । कुंडली विश्लेषण का शुल्क बहुत कम रखा गया है ताकि प्रत्येक व्यक्ति इस सुविधा का लाभ उठा सके, आप भी अवश्य इसका प्रयोग करें, मैं इसकी लिंक शेयर कर रहा हूं -
अस्तु ।
राजीव