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🙏त्वदीयं वस्तु गोविन्दं तुभ्यमेव समर्पयेत 🙏

Posts (130)

May 26, 20267 min
सौन्दर्य बोध विशेषांक - भाग ‌‌‌६ (अप्सरा/यक्षिणी हृदय कीलन क्रिया)
शक्ति कीलन की यह क्रिया साधना के प्रारंभ में की जाती है । मंत्र लिखते समय जब आप मंत्र के अक्षरों को लिखते हैं, तो उस अक्षर पर २१ बार मूल मंत्र को जप कर अनामिका उंगली का स्पर्श करना चाहिए । ये क्रम अंतिम अक्षर तक रहता है । यही क्रिया शक्ति कीलन की क्रिया कहलाती है । उसके बाद इस यंत्र पर त्राटक का अभ्यास करते हुये मूल साधना मंत्र का जप करना चाहिए । इस क्रिया के द्वारा साधक अप्सरा या यक्षिणी को अपने मंत्रों से कीलित कर लेता है या बांध लेता है और, अप्सरा या यक्षिणी को प्रत्यक्ष होने और सिद्धि देने..

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Mar 28, 202610 min
सौन्दर्य बोध विशेषांक - भाग ‌‌‌५ (अप्सरा साधनाओं में सफलता के सूत्र)
जरा सोचिये कि एक सामान्य स्त्री भी आपको देखकर आपके मनोभावों का पता कर सकती है तो क्या अपार शक्ति संपन्न अप्सरा और यक्षिणियां ऐसा नहीं कर सकेंगी । वास्तविकता तो यह है कि हम जैसे होते हैं, और चिंतन करते हैं, हमारे चारों ओर वैसा ही ऊर्जा क्षेत्र निर्मित हो जाता है । यदि यह सात्विक है तो यह न सिर्फ सामान्य जनों को आकर्षित करता है, बल्कि साधना संपन्न होने पर देव वर्ग को भी आकर्षित करने की क्षमता रखता है । इसलिए चिंतन हमेशा सात्विक रहना चाहिए ।

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Dec 4, 202511 min
सौन्दर्य बोध विशेषांक - भाग ‌‌‌4 (पंचदशी यंत्र निर्माण एवं दिव्य नेत्र जागरण क्रिया)
अप्सरा और यक्षिणी साधनाओं के लिए पंचदशी यंत्र की सिद्धि का होना अति आवश्यक है, ये यंत्र इन साधनाओं में सफलता प्राप्त करने हेतु साधक के लिए आधार का कार्य करता है । जब सदगुरुदेव ने धनदा शिविर का आयोजन किया था तो शिष्यों के सामने इस यंत्र की महत्ता को स्पष्ट करते हुये बताया था कि कैसे पंचदशी यंत्र और सिद्धिप्रद मंत्र अप्सरा - यक्षिणी साधनाओं में सफलता प्राप्ति के लिए आवश्यक होता है और इसकी क्या भूमिका होती है ।

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Rajeev Sharma

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