सदगुरु कृपा विशेषांकः सौन्दर्य बोध विशेषांक - भाग 3 (वीर एवं भैरव स्थापन)
- Rajeev Sharma
- Nov 7, 2025
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कामाक्षी माला के निर्माण के बाद की महत्वपूर्ण क्रियायें
आसन संस्कार

भूमि को भली - भांति शुद्ध कर भूमि पर कुमकुम से मैथुन चक्र का निर्माण करने के बाद उस पर आसन बिछा दें । मैथुन चक्र के मध्य में बिंदु का अंकन नहीं करना है । आसन के ऊपर निम्न मंत्र का 21 बार उच्चारण करते हुये जल के छींटे दें -
।। ॐ श्रं श्रंगाटिकायै श्रं ॐ ।।
उसके बाद अपना दैनिक पूजन संपन्न कर लें । दैनिक पूजन से तात्पर्य गणपति पूजन, गुरु पूजन, गुरु मंत्र की 5 माला एवं अन्य किसी महत्वपूर्ण मंत्र या स्तोत्र आदि के जप से है ।
वीर स्थापन
अप्सरा साधना हेतु - इंद्र स्थापन
यक्षिणी साधना हेतु - कुबेर स्थापन
इंद्र स्थापन -
दिनः गुरुवार या रविवार
प्रक्रिया के लिए निर्धारित समयः इस प्रक्रिया को लगातार तीन दिन तक प्रातः काल करना होता है ।
इंद्र की स्थापना के लिए आपको सबसे पहले इंद्र गुटिका का निर्माण करना होगा । इंद्र गुटिका का निर्माण मिट्टी से किया जाता है । आकार में यह गुटिका एक कंचे के आकार की होती है ।
गुटिका बनाने के लिए मिट्टी, किसी तालाब या नदी की ही प्रयोग करें । अगर ऐसा संभव न हो तो किसी कुंए के पास की साफ मिट्टी का भी प्रयोग किया जा सकता है । अब इस मिट्टी में गोरोचन, हल्दी और चंदन का बुरादा मिलाकर गुटिका तैयार कर लें । ध्यान रहे, मिट्टी में रेत के कण नहीं होने चाहिए ।
गुटिका के निर्माण के समय निम्न मंत्र का उच्चारण करते रहें -
।। ॐ ह्रीं इन्द्रायै ह्रीं ॐ ।।
इसके बाद इस मिट्टी की गुटिका को सफेद तिल की ढेरी के ऊपर स्थापित कर लें और गुटिका के सामने पूर्ण विनम्र और श्रद्धा भाव से ब्रह्मर्षि विश्वामित्र का ध्यान और आवाहन करें । इसके लिए आप आवाहन मुद्रा का प्रयोग करें और गुटिका पर पुष्प अर्पित करें ।

अब आप, ब्रह्मर्षि विश्वामित्र से साधना करने की अनुमति और सफलता की प्रार्थना करें, और ब्रह्मर्षि विश्वामित्र सिद्धि मंत्र की 3 माला जप करें -
।। ॐ ऐं ऐं क्लीं क्लीं हुं हुं नमः ।।
प्रत्येक माला के जप के बाद गुटिका पर त्रिगंध या अष्टगंध की एक बिंदी अवश्य लगायें । इस प्रकार तीन माला जप करने में कुल 3 बिंदी लगायी जाएंगी ।



