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अंक विद्या-भाग ‍२

Updated: Aug 29, 2023

सर्व सिद्धि दाता - पंद्रह का यंत्र


अंक विद्या का प्रयोग केवल ज्योतिष में ही नहीं होता है बल्कि सदगुरुदेव ने इसके विभिन्न आयामों पर प्रकाश डाला है । जिन लोगों ने मंत्र-तंत्र-यंत्र पत्रिका के वर्ष 80 के दशक में प्रकाशित अंकों का अध्ययन किया होगा, उन्हें अंक पद्धति पर आधारित यंत्रों का भी ज्ञान मिला होगा । पर सब लोग उतने भाग्यशाली नहीं हो सकते - जिनको स्वयं सदगुरुदेव ने अपने हाथों से सिखाया था, उनके सौभाग्य की तुलना किसी भी चीज से नहीं की जा सकती ।

पर, फिर भी सदगुरुदेव तो कृपा निधान हैं और आने वाले समय को देखकर पहले ही सब कुछ ग्रंथों के माध्यम से सुरक्षित रख दिया था ।


यंत्र चिंतामणि में बताया गया है कि जब जीवन के पुण्य उदय होते हैं, और भविष्य कल्याणकारी होता है, तभी व्यक्ति के मन में यंत्र प्राप्त करने या यंत्र उत्कीर्ण करने का विचार आता है । यंत्र का लेखन प्राचीन काल से होता आया है, और हमारे पूर्वजों ने इस बात को अनुभव किया है कि यदि सही प्रकार से यंत्र उत्कीर्ण हो और उसको पूरी तरह से उपयोग में लाया जाए तो उससे श्रेष्ठ और कोई विधि विधान नहीं है ।


ये यंत्र दिखने में अत्यंत सरल और सामान्य प्रतीत होते हैं परंतु उनका प्रभाव निश्चित रुप से अत्यधिक व्यापक और महत्वपूर्ण होता है । पंद्रह का यंत्र इसी प्रकार के श्रेष्ठ यंत्रों में से एक हैं, जिसका उपयोग सैकड़ों वर्षों से भारतीय करते आ रहे हैं ।


(पंद्रह का यंत्र)

पंद्रह का यंत्र जिसे पंद्रहिया यंत्र भी कहा जाता है, दरिद्रता नाशक, आर्थिक उन्नति और सभी प्रकार की समृद्धि देने वाला माना जाता है, इसीलिए दीपावली के अवसर पर घर के मुख्य द्वार पर पंद्रह का यंत्र अंकित किया जाता है, व्यापारी लोग अपनी बहियों पर दीपावली पूजन के समय बही के प्रथम पृष्ठ पर पंद्रह का यंत्र अंकित कर उसे लक्ष्मी का पर्याय मानकर उसकी पूजा करते हैं ।

दीपावली के समय लक्ष्मी पूजन सब लोग करते हैं लेकिन जो महत्वपूर्ण यंत्र निर्माण का कार्य होता है, उस पर शायद ही कोई ध्यान देता है । पंद्रह का यंत्र जीवन में अनुकूलता तो लाता ही है, जीवन में धन के अन्य स्रोतों का भी निर्माण करता ही है । इसलिए दीपावली पूजन के समय ही इस यंत्र निर्माण के कार्य को संपन्न कर लिया जाए तो अति उत्तम है । वैसे आप किसी भी शुभ समय में यंत्र निर्माण कर ही सकते हैं । दीपावली पूजन की विधि अगली पोस्ट में दे दी जाएगी, इससे उन लोगों को सुविधा होगी जिनके पास गुरुधाम से किन्हीं कारणों वश पत्रिका नहीं आ पाती है ।


वैसे, घर में किसी प्रकार की समस्या आने पर भी विद्वान लोग पंद्रह के यंत्र के उपयोग की सलाह देते हैं । इस दृष्टि से यह यंत्र अत्यधिक सरल होने के साथ - साथ अत्यधिक महत्वपूर्ण और प्रभाव युक्त है ।


यंत्र को किसी भी सफेद कागज पर या बही पर केसर या कुमकुम से उत्कीर्ण किया जा सकता है ।

इसके अलावा भी सदगुरुदेव ने कुछ विशिष्ट प्रयोगों को स्पष्ट किया है -

  1. इस यंत्र को कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी के दिन बरगद की कलम से सफेद कागज पर १००१ बार लिखने से धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष की प्राप्ति होती है ।

  2. यदि अगर की कलम से यह यंत्र पृथ्वी पर १००० बार लिखें तो, शत्रु भय समाप्त हो जाता है तथा बंधन से मुक्त हो जाता है ।

  3. पीपल की कलम से पीपल के पत्तों पर इस यंत्र को १००० बार उत्कीर्ण किया जाए और उन पीपल के पत्तों को लक्ष्मी जी के सामने रखा जाए तो दरिद्रता का नाश होता है । इस प्रकार यंत्र उत्कीर्ण करने में केसर या कुंकुम का प्रयोग किया जा सकता है ।

  4. गौ-मूत्र, गोरोचन और कपूर बराबर मात्रा में मिलाकर स्याही बनाये और, पीपल के जड़ की कलम से एकांत में बैठकर भोजपत्र पर यदि यह यंत्र १००० बार उत्कीर्ण करे, तो शीघ्र ही उसे मनोवांछित सफलता प्राप्त होती है ।

  5. यदि आक के पत्तों पर, आक के ही दूध से १०८ बार यह यंत्र उत्कीर्ण कर, वे पत्ते आक के ही पेड़ से बांध दिये जाएं तो, ज्यों-ज्यों ये पत्ते सूखते जाएंगे, त्यों-त्यों उसका शत्रु देह-शूल, ज्वर और अन्य बीमारियों से ग्रस्त होता जाएगा - बांधने से पूर्व शत्रु का नाम अवश्य उच्चरित करें, कि मैं अमुक शत्रु के नाश के लिए यह प्रयोग कर रहा हूं । इस प्रयोग को रविवार को करना चाहिए ।

  6. बेल, हरताल और मैनसिल इन तीनों को बराबर मात्रा में घोलकर स्याही बना लें और, बड़ की कलम से कागज पर यह यंत्र २१०० बार उत्कीर्ण करने से व्यापार में वृद्धि होती है ।

  7. एक सपाट पत्थर लेकर, हल्दी को भिगोकर, उसकी स्याही से पत्थर पर, किसी भी कलम से १०८ बार यह यंत्र उत्कीर्ण कर शत्रु के दरवाजे के सामने गाड़ दिया जाए तो, शत्रु के घर में हर समय कलह बनी रहती है और, वह निरंतर दुखी रहता है ।

  8. कपूर और हल्दी बराबर मात्रा में लेकर उसे भोजपत्र पर अंकित कर चांदी के ताबीज में डालकर गले में बांध देने से बालकों से संबंधित सभी रोग समाप्त हो जाते हैं और, बालक स्वस्थ एवं निरोग बना रहता है ।

  9. भोजपत्र पर केसर से यह यंत्र उत्कीर्ण कर चांदी के ताबीज में डालकर भुजा पर बांध दे, तो शिक्षा में सफलता मिलती है और, परीक्षा में सफल होता है ।

  10. एक किलो गेहूं का आटा भिगोकर उस पर केसर से पंद्रह का यंत्र बनाकर फिर उस आटे की १००० गोलियां बनाकर मछलियों को खिलायी जाएं तो प्रेमी - प्रेमिका में या पति पत्नी में परस्पर समझौता हो जाता है, तथा भविष्य में किसी प्रकार का कोई वाद-विवाद नहीं रहता ।

  11. जिनको संतान प्राप्ति की इच्छा हो, उन्हें चाहिए कि बड़ के पत्तों पर यह यंत्र १००० बार कुंकुम से उत्कीर्ण करे, और फिर ये १००० बड़ के पत्ते संदूक में रख दे, और नित्य रविवार को इसके सामने दीपक लगाकर संतान प्राप्ति की इच्छा प्रकट करे तो शीघ्र ही संतान प्राप्ति होती है ।

  12. यदि व्यक्ति शारीरिक रुप से कमजोर हो या नामर्द हो अथवा किसी प्रकार की बीमारी हो तो उसको चाहिए कि कुंकुम और हल्दी को मिलाकर इसके लेप से कांसे की थाली में १००८ बार इस यंत्र को उत्कीर्ण करे, तो उसी दिन से उसकी बीमारी समाप्त होने लगती है, और शरीर में साहस एवं ताकत का अनुभव होने लगता है ।

  13. जिनको पेट संबंधी बीमारी हो, उन्हें चाहिए कि वे शनिवार को केले के पत्ते पर केसर से १०८ बार इस यंत्र को उत्कीर्ण करे, ऐसा करने पर पेट से संबंधित सभी रोग समाप्त हो जाते हैं ।

  14. सोने की कलम से केसर द्वारा कागज पर यह यंत्र अंकित कर फ्रेम में मढवाकर पूजा स्थान में रख दिया जाए तो, उसके जीवन में किसी प्रकार का कोई अभाव नहीं रहता ।

  15. केसर, चंदन, अगर, कपूर और कस्तूरी को मिलाकर सोने की कलम से कागज पर यंत्र उत्कीर्ण कर अपने घर के गहनों के संदूक में, तिजोरी में या दुकान पर यह यंत्र रख दिया जाए, तो आगे के पूरे जीवन भर वह उन्नति करता रहता है, और सभी दृष्टियों से संपन्न होकर पूर्णता प्राप्त करता है ।

सदगुरुदेव स्पष्ट कहते हैं कि यह यंत्र वस्तुतः अत्यधिक महत्वपूर्ण, श्रेष्ठ और प्रभावयुक्त है, तथा सैकड़ों - हजारों लोगों ने इसके प्रयोग से लाभ उठाया है ।


आप सब दीपावली के शुभ अवसर पर इस यंत्र का निर्माण कर सकें, जीवन में अनुकूलता प्राप्त कर सकें और जीवन में श्रेष्ठ सफलता प्राप्त कर सकें, ऐसी ही शुभेच्छा है ।


अस्तु ।

 

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