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अंक विद्या-भाग ‍१

Updated: Aug 29, 2023

अंक विद्या के प्रयोग से प्रश्न का उत्तर ज्ञात करना


अष्टक वर्ग में हमने जीवन के कई रहस्यों को इस प्रकार से खुलते हुये देखा है कि कहीं पर कोई गोपनीय बात बचती ही नहीं है । अगर गणना ठीक तरीके से की जाती है तो हम न सिर्फ भूतकाल और वर्तमान भी जान सकते हैं बल्कि हमें भविष्य भी स्पष्ट ज्ञात हो जाता है । हालांकि अष्टक वर्ग की यह सब गणना उन व्यक्तियों के लिए महत्वपूर्ण है जिनका जन्म समय हमें ज्ञात होता है । बिना जन्म समय और स्थान की जानकारी के अष्टक वर्ग की गणना करना कम से कम हमारे लिए तो असंभव ही है ।


आज भी समय - समय पर लोग अपने अष्टक वर्ग की गणना के लिए हमारे पास डिटेल्स भेजते रहते हैं । यथासंभव सबकी जिज्ञासाओं का समाधान करने का प्रयास करना हमारे लिए एक गुरु कार्य ही है और, इस कार्य को हम हमेशा करते रहेंगे । इस कार्य के लिए किसी से कोई फीस नहीं ली जाती है इसलिए अगर मन में कोई प्रश्न आये तो निःसंकोच आपको हमसे संपर्क कर लेना चाहिए । यह सब सदगुरुदेव का ही तो दिया हुआ ज्ञान है, आप सबके साथ बांटने में हमें बहुत प्रसन्नता होती है ।


खैर, अब बात करते हैं उनकी जिनको अपने जन्म समय का ज्ञान ही नहीं है । और, ऐसा तो है नहीं कि आपको ऐसे लोग न मिलें जिनको अपने जन्म समय का ज्ञान नहीं है । कारण चाहे तो भी रहा हो, लेकिन आज भी बहुत सारे ऐसे लोग हैं जिनको अपने जन्म समय का ज्ञान नहीं होता है अथवा जन्म समय की सटीकता में संदेह होता है । ऐसे लोगों का अष्टक वर्ग तो नहीं बनाया जा सकता है, और ये लोग किसी ज्योतिषी के पास जाकर भी कोई फायदा नहीं उठा सकते हैं । क्योंकि ज्योतिषी तो उनसे जन्म समय पूछेगा ही । तो क्या इन लोगों के लिए ज्योतिष में कुछ भी उपाय नहीं है?


शायद इन सभी बातों को ध्यान में रखते हुये ही सदगुरुदेव ने सैकड़ों विधाओं को सामने रखा है जिनके माध्यम से हम अपने जीवन में सामने खड़े प्रश्नों के उत्तर ज्ञात कर सकें । उनको पता था कि आने वाला समय और भी कठिन है, इसलिए अपने ग्रंथों के माध्यम से उन्होंने उन सब समस्याओं का बहुत पहले ही निराकरण कर दिया था, जो समस्यायें आज के युग में अथवा भविष्य में मनुष्य के सामने आने वाली हैं । ऐसी ही एक अद्भुत विद्या है जिसे सदगुरुदेव ने अंक विद्या का नाम दिया है ।


अंकों द्वारा प्रश्न विचार


अंकों द्वारा प्रश्न विचार एक महत्वपूर्ण पद्धति है । भारतीय ज्योतिष में तो प्रश्न पद्धति पर कई पुस्तकें हैं तथा इसके कई प्रकार हैं । पर हम यहां सदगुरुदेव प्रदत्त अंक विद्या की कला-पद्धति का विवरण दे रहे हैं । यह एक आसान, सटीक, महत्वपूर्ण और प्रामाणिक पद्धति है और आप स्वयं अपने जीवन में इसका प्रयोग करके देख सकते हैं ।


प्रश्न करने वाला सबसे पहले 9 अंकों की एक संख्या लिख ले । तत्पश्चात अंक-ज्योतिर्विद को चाहिए कि उसमें ३ जोड़ दे और जो योग आये, उसके अनुसार फल कहे ।


उदाहरण के लिए - एक व्यक्ति ने अपने प्रश्न का शुभाशुभ जानने के लिए निम्न संख्या लिखी -


438527581=43

हमेशा इसमें 3 जोड़ दें -

43 + 3 = 46


इस 46 की संख्या के अनुसार जो फल हो, वह सही होगा ।


आसान है न । कभी - कभी हम बहुत ही दुविधा में होते हैं कि अमुक समस्या है । क्या किया जाए या क्या न किया जाए । जब भी मन में सवाल का तीव्रतम वेग उठे, उस वक्त प्रश्न का विचार मन में करना चाहिए और 9 अंकों की संख्या लिखनी चाहिए; ये संख्या कोई भी हो सकती है । ऐसी परिस्थिति में फलकथन एकदम सटीक होता है ।


अब आप सोच रहे होंगे कि यह 9 अंकों की संख्या लिखने से क्या होगा । दरअसल होता क्या है कि हम अपने मन में जो भी विचार लाते हैं वह हमारे आंतरिक ब्रह्मांड से जुड़ा होता है और, आंतरिक और वाह्य ब्रह्मांड में कोई भेद नहीं होता है । आप ये भी जानते ही होंगे कि समस्त प्रश्नों का उत्तर भी काल क्रम में कहीं न कहीं छुपा होता है । तो, जब हम किसी समस्या से जूझ रहे होते हैं तो हमारे मानस के प्रश्न ही हमें वह संख्या लिखने के लिए बाध्य करते हैं जो उस प्रश्न का अंक रुप है । सदगुरुदेव ने इसी को समझाया है कि जब प्रश्न को अंक रुप में लिख लिया जाए तो इसको हल करना कोई बड़ी बात नहीं है । और, आप ये न सोचिये कि आप अपनी मर्जी से कुछ भी लिख सकेंगे । प्रश्न विचार के समय आपके मस्तिष्क में जो भी अंक आयेंगे वह दरअसल उसी प्रश्न का अंक रुप हैं । इसलिए बेहतर यही रहता है कि जब मन बहुत उद्विग्न हो और प्रश्न आपके मन मस्तिष्क पर छाया हो, तब इस गणना को करना चाहिए ।


एक ही सवाल के लिए बार - बार अंकों को लिखने का प्रयास नहीं करना चाहिए । जो भी अंक आयेगा वह आपका ही सवाल का अंक रुप है । वह गलत नहीं होता है ।


प्रश्न कर्ता बड़ी से बड़ी संख्या 9 बार लिख सकता है, सबसे बड़ी संख्या 9 है और, उसे 9 बार लिखने पर संख्या बनती है - 999999999 जिसका योग 81 तथा 3 जोड़ने पर 84 होते हैं ।


प्रश्न कर्ता छोटी से छोटी संख्या 0 भी 9 बार लिख सकता है 000000000 जिसका योग 0 तथा 3 जोड़ने पर योग 3 होता है ।


इस प्रकार छोटी से छोटी संख्या 3 और बड़ी से बड़ी संख्या 84 हो सकती है । अतः 3 से लगाकर 84 तक का शुभाशुभ ज्ञात किया जाता है ।


फलकथन


3 - आप परेशान हैं तथा अपने संबंधी की बीमारी से चिंतित हैं । समय अनुकूल नहीं है तथा कुछ समय बाद ही आपको कठिनाइयों का सामना करना पड़ेगा ।


4 - आप जो कुछ भी सोच रहे हैं, वह प्रेम का मसला है, यह किसी प्रसन्नता का समाचार है । निश्चय ही आप अपने मंतव्य में सफल होंगे पर सावधानीपूर्वक आगे बढ़ना आवश्यक है ।


5 - आप जो समझौता कर रहे हैं वह इस समय तो ठीक है पर आगे जाकर यह विपरीत गुल खिलायेगा । अतः आप चौकन्ने होकर ही कार्य करें तथा जो भी करें, वह भली प्रकार से सोच - विचार कर करें । फिलहाल आप इस योजना को स्थगित रखिये ।


6 - जिस यात्रा की आप तैयारी कर रहे हैं, वह शुभ फलदायक है । आप बिना हिचकिचाहट के निश्चिंत होकर यात्रा कीजिए, आप अवश्य ही सफल होंगे ।


7 - उतावली करना ठीक नहीं, क्योंकि जो भी काम सोच-विचारकर धीरे - धीरे होता है, वह ज्यादा सफल, ज्यादा ठोस और ज्यादा आनंददायक होता है । शीघ्र ही आपका मकान बन सकेगा । योजना क्रियान्वित रखिये, सफलता मिलेगी ।


8 - आपका चिंतन सही दिशा की ओर है । आप जिस कार्य के बारे में सोच रहे हैं, वह निश्चय ही सफल होगा । यदि आप किन्हीं दूरस्थ रिश्तेदारों के आगमन के बारे में सोच रहे हैं, तो उनका आना इस समय शायद संभव न हो ।


9 - निश्चय ही जिस समय आपने समझौता या इकरारनामा किया था, तभी गलती कर दी थी जिसका परिणाम इस समय भुगतना पड़ रहा है । फिर भी यथासंभव आप अपने पर नियंत्रण रखें, अनुकूल समय आने पर स्वतः ही कार्य में सफलता मिल जाएगी ।


10 - आप जो परेशान हो रहे हैं, इसका मूल कारण आप स्वयं हैं क्योंकि लापरवाही और गलतफहमी से आप निरंतर मामला उलझाते रहे । और, उसी का परिणाम यह आज की ऐसी स्थिति है । आप आगे के लिए सावधान रहें । जो कुछ निर्णय लेना है, शीघ्र निर्णय लें, तभी आप अनुकूल स्थिति में आ सकते हैं ।


11 - आपका प्रश्न सफल है, और जिस प्रश्न के बारे में आप सोच रहे हैं वह आपके पक्ष में रहेगा । आपके मन में धोखा देने की प्रवृत्ति है या कपट की जो भावना है, इसे दूर रखिये तभी भविष्य में आपका संबंध मधुर रह सकता है ।


12 - कार्य सफल होगा । आप जिस गति और तत्परता से कार्य कर रहे हैं, वह सराहनीय है । शीघ्र ही आपको शुभ समाचार मिल सकेंगे । पर अभी मंजिल दूर समझेंं अर्थात कार्य में शिथिलता न आने दें ।


13 - आपका प्रश्न अनुकूल नहीं । काम में निरंतर व्यवधान आयेंगे तथा कार्य सिद्धि में संदेह है । फिर भी आप प्रयत्न करते रहें, इससे कुछ - न - कुछ तो बिगड़ी स्थिति सुधारने में सफल हो ही सकेंगे ।


14 - आपका प्रश्न विवाह से संबंधित है । आप चिंतित हैं उसकी उम्र तथा विवाह में विलंब के भय से । यह समस्या आपकी बहिन या पुत्री से संबंधित हो सकती है ।


15 - प्रश्न उत्तम है । शीघ्र ही आपका कार्य संपादित होगा और वह भी इतनी उत्तम रीति से संपन्न होगा कि आप स्वयं चमत्कृत हो उठेंगे । प्रश्न को देखते हुये कार्य शीघ्र ही आपके अनुकूल संपन्न होना चाहिए ।


16 - शीघ्र ही आपको शुभ समाचार मिलेगा । जिस समाचार के बारे में आप उतावले हैं या, जिसे जानने के लिए आप आकर्षित हैं, वह समाचार कुछ ही दिनों में आपको दिखाई देगा । आप निश्चिंत रहें, कार्य आपके पक्ष में सिद्ध होगा ।


17 - प्रश्न विपरीत है । शीघ्र ही आप किसी दैवी दुर्घटना से ग्रस्त होंगे या रोग ग्रस्त होंगे । अतः अच्छा हो कि आप पहले से ही सावधानी बरतें । स्वास्थ्य की तरफ विशेष ध्यान दें ।


18 - आपका विचार सही है और, आप जो कुछ सोच रहे हैं वह सफल होगा । यद्यपि यह बात निश्चित है कि इसमें विलंब संभव है । प्रयत्न करते रहें, समय आपके अनुकूल है ।


19 - आप व्यर्थ में ही परेशान हो रहे हैं एवं परिश्रम कर रहे हैं । जिस कार्य के बारे में आप सोच रहे हैं, वह सफल होगा ही, ऐसे आसार दिखाई नहीं देते हैं । प्रश्न की दृष्टि से आपका प्रयास निरर्थक है ।


20 - आप पत्र - व्यवहार चालू रखें, हो सकता है कि कुछ समय बाद आप मनोनुकूल उत्तर पा जाएं । पर एक बात निश्चित है कि आप बहुत अधिक उतावले हैं और, उतावली के कारण ही आपके कार्य संपादन में बाधा पड़ती है या, कार्य संपन्न होते - होते रुक जाता है ।


21 - प्रश्न विलंब का है । आपका कार्य सफल तो होगा पर इसमें विलंब अपेक्षित है । यह भी साथ में कह देना अत्यंत उपयुक्त होगा कि आप अपने - आपको समय के भरोसे छोड़ दें - समय स्वतः ही अवसर आने पर आपका कार्य संपन्न कर देगा ।


22 - आप इस समय जिस समस्या से ग्रस्त हैं वह आपकी घरेलू समस्या है और, घर के इस तनावपूर्ण वातावरण ने आपको झकझोर दिया है । जहां तक हो सके, दृढ़ बने रहिये और अपने विचारों पर दूसरों का हावी न होने दें ।


23 - आपका प्रश्न भौतिकता से संबंधित है पर यह भी स्पष्ट है कि अभी तक आपकी मंजिल काफी दूर है । प्रयत्न करते रहिये । परिश्रम ही वह सीड़ी है, जिस पर चढ़कर आप सफलता के द्वार खटखटा सकते हैं । परिश्रम, लगन एवं धैर्य बनाये रखिये, आपका कार्य सफल होगा ।


24 - इस समय आपकी स्थिति ड़ांवाड़ोल है तथा, प्रतिकूल है । फिलहाल आपका कार्य संपन्न होने के आसार दिखाई नहीं देते । हां, लगभग 6 महीने बाद आप इसी कार्य में सफलता प्राप्त कर सकेंगे । सतर्कता एवं सूझबूझ इस पूरे समय अपेक्षित रहेगी ।


25 - आपका कार्य सफल होगा और शीघ्र ही मनोवांछित सूचना मिल सकेगी । यह सब इतने अप्रत्याशित तरीके से होगा कि आप स्वयं आश्चर्यचकित हो उठेंगे । आर्थिक दृष्टि से यह समय पूर्णतः आपके अनुकूल है ।


26 - उतावली और अधीरता आपके लिए मृत्यु के समान है । अतः धीरे- धीरे और सोच-विचारकर योजना बनाइये जिससे आप उसका लाभ उठा सकें । आप निरंतर असफल हो रहे हैं और यह असफलता उतावली से उत्पन्न है ।


27 - कार्य सिद्धि होगी । जीवन में ईश्वर का सहारा सबसे बड़ा सहारा है जिसे आप छोड़ बैठे हैं, और इसलिए आप इधर-उधर भटक रहे हैं । सब कुछ ईश्वर पर डाल दीजिए, आप स्वयं देखेंगे कि विपरीत परिस्थितियां आपके अनुकूल होती जा रही हैं ।


28 - आपके कार्य की सफलता संदिग्ध है । यद्यपि आप अत्यधिक परिश्रम कर रहे हैं तथा, येन - केन प्रकारेण कार्य के सफल होने की उम्मीद लगाये बैठे हैं, पर यह सब व्यर्थ है । यह कार्य संपन्न होना और बालू में से तेल निकालना बराबर है ।


29 - आपका स्वास्थ्य ठीक नहीं है, इसी कारण इस कार्य के प्रति आप उतना ध्यान नहीं दे पाते हैं जितना देना चाहिए था । इसलिए आपको सबसे पहले अपने स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बरतनी चाहिए ।


30 - आपका प्रश्न उत्तम है । शीघ्र ही आपको मनोवांछित एवं अनुकूल समाचार सुनने को मिलेंगे । ये समाचार मनोनुकूल होंगे जिससे परिवार में एवं घर में प्रसन्नता का, मुग्धता का वातावरण बन सकेगा ।


31 - अव्यवस्था प्रत्येक प्रकार की असफलता की जननी है और आप जिस कारण से परेशान हैं या, जिस कारण से असफलता का मुंह देखना पड़ रहा है, उसका मूल कारण ही यह अव्यवस्था है । यह बात तो निश्चित समझें कि जब तक यह अव्यवस्था रहेगी तब तक आपकी सफलता संदिग्ध ही बनी रहेगी ।


32 - लेन - देन के मामले में आप निरंतर सतर्कता बरतें, क्योंकि आगे का कुछ समय ऐसा आ सकता है जिसके फलस्वरूप आप धोखे में रहें या कठिनाई में पड़ जायें । अतः आगे के 4 - 5 महीने सतर्कता बरतने के हैं ।


33 - आप तैयार रहिये, शीघ्र ही आपको मनोवांछित समाचार सुनने के मिलेंगे । आपका प्रश्न सीधा धन से संबंधित है और, जिस कार्य के लिए आप काफी समय से परेशान थे और जो आमदनी का स्रोत रुका हुआ था वह शीघ्र ही खुल जाएगा । और, इस प्रकार से लाभदायक समाचार सुनने को मिलेंगे ।


34 - आपके मन में काफी समय से घुमटन चल रहा है और पसोपेश तथा असमंजस में हैं कि ये काम करुं अथवा नहीं । परंतु जहां तक प्रश्न का संबंध है, आपको बिना हिचकिचाहट यह समझौता कर लेना चाहिए, क्योंकि इसका सुपरिणाम शीघ्र ही आपको सुनने को मिलेगा ।


35 - आप यह पक्की तरह समझ लीजिए कि केवल मामूली जान-पहचान के बल पर इतनी बड़ी जोखिम उठाना अक्लमंदी नहीं । धीरे - धीरे उसके चरित्र का अध्ययन कीजिए और, जब आप पक्की तरह से आश्वस्त हो जायें, तभी आप उस पर विश्वास कर लेन - देन का कार्य करें ।


36 - आकस्मिक लाभ का कोई योग आपके जीवन में नहीं है अतः व्यर्थ में ही आप लॉटरी, जुआ या सट्टेबाजी में धन फूंक रहे हैं । प्रश्न बाधक है और आपके कार्य संपादन में कई बाधायें दृष्टिगोचर हो रही हैं ।


37 - मुकदमेबाजी या झगड़ा या वाद-विवाद में आप शीघ्र ही ग्रस्त होंगे और, इस प्रकार एक नया सिरदर्द अपने लिए मोल ले लेंगे । अतः सलाह यही है कि निकट भविष्य में यदि वाद-विवाद की स्थिति बन जाए तो आप चतुराई से किनारा कर लें, उलझना बुद्धिमत्ता नहीं होगी ।


38 - आपका स्वास्थ्य इस समय आपके अनुकूल नहीं है और, इसका कारण भी यही है कि आप शरीर को शरीर नहीं समझते हैं बल्कि उससे जबरदस्ती काम लेते हैं । आप तंदरुस्त रहें । यद्यपि प्रश्न की दृष्टि से अगला समय आपके अनुकूल नहीं कहा जा सकता ।


39 - आपका प्रश्न अनुकूल है, तथा इस समय जो भी प्रश्न आपके मन में है वह शीघ्र ही संपन्न होगा । आपको चाहिए कि आप कार्य की पूर्णता के लिए तैयारी कर लें ।


40 - आपका प्रश्न धन से संबंधित है और आप चाहते हैं कि किसी प्रकार ऊंचे उठ सकें । आप प्रमोशन या धन लाभ के बारे में विचार कर रहे हैं । जहां तक प्रश्न का संबंध है, आपके कार्य में अभी विलंब की संभावना है ।


41 - पिछले कुछ दिनों में जो घटनायें घटी हैं, वे आपके अनुकूल नहीं कहीं जा सकतीं, क्योंकि यह समय सर्वथा आपके अनुकूल नहीं है । आपको चाहिये कि आप पैसों के मामले में लापरवाही न बरतें और न पैसों का दांत से पकड़ें, क्योंकि दोनों ही स्थितियों में आपके सम्मान को खतरा है ।


42 - जहां तक हो सके आप दोनों परस्पर ही निपट जाएं तो अच्छा रहेगा । व्यर्थ का वाद-विवाद आपके हित में नहीं है । आपको चाहिए कि आप संयमित रहें और अपने आपको पूर्ण नियंत्रण में रखें । प्रश्न आपके अनुकूल नहीं है ।


43 - आपका प्रश्न किसी पुरानी जायदाद के विषय में हो सकता है, तथा उससे संबंधित मुकदमे में ग्रस्त हो सकते हैं । यद्यपि आपको धैर्य की आवश्यकता है पर यह भी निश्चित समझिये कि यह कार्य अंततः आपके पक्ष में ही होगा । प्रश्न विलंब से सिद्धिप्रद है ।


44 - अत्यधिक श्रम और कम-से-कम आराम मृत्यु को ही निमंत्रण है और आप इसी पथ पर अग्रसर हो रहे हैं । हां, यह आवश्यक है कि जीवन पथ पर बढ़ने के लिए श्रम अनिवार्य है, पर श्रम के साथ - साथ आराम भी कीजिए । कार्य सिद्धि में संशय है ।


45 - आप निश्चिंत रहें, शीघ्र ही आपको शुभ समाचार सुनने के मिलेंगे । जिस समाचार के लिए आप उतावले हो रहे हैं, वह शुभ समाचार निकट भविष्य में ही मिल सकेगा । प्रश्न पूर्ण अनुकूल एवं शुभ फलदायक कहा जा सकता है ।


46 - आप व्यर्थ में ही परिश्रम कर रहे हैं । जो कार्य आप सोच रहे हैं, वह अनुकूल नहीं हो सकता, यह आप निश्चित समझिए । यद्यपि इस कार्य की संपन्नता के लिए आपको कठिन श्रम करना पड़ा है, अत्यधिक व्यय करना पड़ा है फिर भी, प्रश्नफल आपके हित में जावे, ऐसा प्रतीत नहीं होता ।


47 - मुकदमेबाजी से संबंधित आपका प्रश्न हो सकता है और सही अर्थों में देखा जाए तो आप इस मुकदमेबाजी से ऊब गये हैं और किसी भी प्रकार इससे पिंड छुड़ाना चाहते हैं । जहां तक प्रश्न का फल है, आपको आगे बढ़कर समझौता कर लेना चाहिए ।


48 - प्रश्न आपके अनुकूल है और आप जो कुछ भी सोच रहे हैं वह शीघ्र ही आपके पक्ष में होगा । परंतु इसके साथ ही आप ये भी ध्यान रखिये कि प्रयत्न लगातार होते रहना चाहिए क्योंकि कार्य समाप्ति से पूर्व ही प्रयत्न छोड़ देना असफलताओं को न्यौता देना है ।


49 - आप इस समय जिन परेशानियों से ग्रस्त हैं, आने वाले समय में वे परेशानियां और भी ज्यादा बढ़ सकती हैं । आप अत्यधिक विश्वासी हैं और यह अत्यधिक विश्वास ही आपको धोखे के गर्त में गिराने में सहायक होता है । अतः अधिक अच्छा हो यदि आप समझदारी एवं सूझबूझ से काम लें ।


50 - आप शीघ्र ही यात्रा करेंगे और यह यात्रा अत्यंत ही कष्टप्रद रहेगी । हो सकता है मार्ग में कुछ अघटित घट जाए । एतदर्थ जहां तक हो सके आप यात्रा को स्थगित कर दें ।


51 - प्रश्न अत्यधिक उच्चकोटि का है । शीघ्र ही आपको आकस्मिक लाभ होगा, या जो कार्य आप सोच रहे हैं और उसमें विलंब की संभावना पर विचार कर रहे हैं, वह शीघ्र ही संपन्न हो सकेगा और यह संपन्नता भी इतने आकस्मिक ढंग से होगी कि आप चकित रह जाएंगे ।


52 - आप जिस कार्य के बारे में सोच रहे हैं वह निःसंदेह सफल होगा और आपके इस कार्य में एक और परिचित मित्र सहायक होगा जो आपको बहुत अधिक सहायता देगा । प्रश्न उत्तम है ।


53 - आपकी उलझनें निश्चित रुप से आपके द्वारा ही निर्मित हैं । आप व्यर्थ में ही बहुत अधिक सोचते हैं और अकारण भावी विपत्ति से परेशान और हतोत्साहित हो रहे हैं । आप धैर्य रखिये, यद्यपि प्रश्न की दृष्टि से कार्य - संपन्नता में विलंब हो सकता है ।


54 - जो समय चल रहा है वह आपके पक्ष में हैं - भले ही आपको यह अनुभव न हो रहा हो । पर एक बात का ख्याल रखे कि जो प्रयत्न करके जोर-जबरदस्ती से आगे बढ़ जाता है वह लाभदायक स्थिति में रहता है ।


55 - आपका प्रश्न विपत्ति से संबंधित है और दिमाग में यही उलझन घुमड़ रही है कि किस प्रकार इस विपत्ति से छुटकारा मिल सकता है । यह विपत्ति आपके ही कर्मों का फल है । आपको चाहिए कि हिम्मत से काम लें और कुछ समय तक सुसमय की प्रतीक्षा करें । "जब नीके दिन आइहै वनत न लगिहैं बेर" ।


56 - आप निश्चित रहें, मस्तिष्क में जो उलझन काफी समय से घुमड़ रही है, वह शीघ्र ही समाधान पा सकेगी और इस अंधेरे में भी आप अपने पथ को आलोकित कर सकेंगे । भावी समय आपके अनुकूल है ।


57 - आपकी आर्थिक चिंता स्वाभाविक है, क्योंकि धन से संबंधित कार्य के लिए प्रयत्न आप 1 - 2 दिन से नहीं, काफी समय से कर रहे हैं । अतएव आप एक प्रकार से खिन्नता या हीनता भी अपने आप में अनुभव कर रहे हैं । प्रश्न विलंब से सिद्ध होगा, ऐसा प्रतीत हो रहा है ।


58 - आप जिस व्यक्ति के लिए चिंतित हैं, निश्चित समझिये कि उसके विचार एवं भावनायें आपके अनुकूल नहीं रहीं, और वह उतना ध्यान आपके प्रति नहीं देता है, जितना देना चाहिए । प्रश्न सामान्य है ।


59 - आपका प्रश्न रोग से संबंधित है और आप किसी रोगी की चिंतनीय स्थिति से परेशान हैं । जहां तक प्रश्न का सवाल है, आप चिंता न करें, वह शीघ्र ही रोग मुक्त हो सकेगा ।


60 - प्रश्न का सीधा संबंध ईश्वर, ब्रह्म या किसी ऐसी ही अलौकिक विभूति से संबंधित है जो साधारण नहीं है । आप अपने प्रयत्न में लगे रहिये, शीघ्र ही आप सफलता प्राप्त कर सकेंगे । प्रश्न सामान्यतः शुभ कहा जा सकता है ।


61 - आपका प्रश्न सफल है, और धीरे-धीरे आप यह अनुभव करेंगे कि जो परिस्थितियां अभी तक आपके प्रतिकूल थीं अब अनुकूल बनने लगी हैं, और पहले से ज्यादा मुग्धमय स्थिति है । प्रश्न को देखते हुये शीघ्र ही सफलता प्राप्त कर सकेंगे ।


62 - आपकी लापरवाही ही आपके पतन का कारण है, क्योंकि गत जीवन में ऐसा कई बार हुआ है कि बिना पढ़े, बिना सोचे विचारे आपने पत्रों पर हस्ताक्षर कर दिये हैं, और निकट भविष्य में इसी वजह से आप परेशानी महसूस करेंगे । भविष्य में आपको चाहिए कि आप जहां तक संभव हो, कागज पढ़-समझकर ही सतर्कता से उस पर हस्ताक्षर करें ।


63 - जायदाद के बारे में आप चिंता न करें । हां, यह बात तो सही है कि इस कार्य में काफी व्यवधान हैं तथा कई परेशानियां उठानी पड़ सकती हैं, पर यह भी निश्चित समझिये कि अंततोगत्वा आप अपने कार्य में सफलता प्राप्त कर सकेंगे । प्रश्न विलंब से ही सही, आपके लिए सिद्धिप्रद है ।


64 - प्रश्न आपके अनुकूल नहीं है, और इस संबंध में आप जितना भी प्रयत्न करेंगे, वह सब निष्फल जाएगा, इसलिए अच्छा तो यही होगा कि आप कुछ समय के लिए शांत रहें । प्रश्न सामान्य है ।


65 - शीघ्र ही आपकी यात्रा का योग बन रहा है और जिस कारण से आप यात्रा करने की सोच रहे हैं, वह कार्य आपके पक्ष में ही सिद्ध होगा । यह भी ध्यान रखें कि इन सब कार्यों में शीघ्रता अपेक्षित है । जितना भी विलंब होगा, उतना ही नुकसान आपको होता जाएगा । प्रश्न सफल है ।


66 - प्रश्न काफी उलझनपूर्ण एवं कठिनाइयों से भरा हुआ है । आप स्वयं देखेंगे कि एक समस्या का समाधान करते-न-करते दूसरी समस्या स्वतः ही आपके सामने उपस्थित हो जाती है, और इस प्रकार आप अंतहीन समस्याओं से जूझते जा रहे हैं । अभी तक परेशानियों का अंत नहीं आया है फिर भी आप संघर्षरत बने रहिए ।


67 - प्रश्न निरर्थक है । आप जितना प्रयत्न करेंगे वह सब व्यर्थ एवं निष्फल जाएगा, इसलिए इस संबंध में व्यय करना एकदम व्यर्थ है । अच्छा तो यह है कि आप इस मसले को छोड़ें और कोई अन्य उपाय सोचें जिससे कार्य सिद्धि में सफलता मिल सके ।


68 - प्रश्न सफल है । आप जिस तत्परता और लगन से इस कार्य में ड़टे हुये हैं, उसी तत्परता से लगे रहिये । आप स्वयं देखेंगे कि थोड़े ही दिनों के भीतर आप अपनी मनोकामना सिद्ध कर सकेंगे । समय आपके अनुकूल है ।


69 - यह समय आपके व्यापार - व्यवसाय का है और यदि आप इन दिनों में प्रयत्न करें तो अन्य समय की अपेक्षा इन दिनों किये गये निर्णयों से ज्यादा लाभ उठा सकते हैं । जब श्रेष्ठ दिन हों या अनुकूल समय हो तो बुद्धिमान व्यक्ति उसके एक - एक क्षण का उपयोग करते हैं । आप एक क्षण भी व्यर्थ न खोयें ।


70 - आपका प्रश्न पत्नी से संबंधित है और प्रश्न सामान्यतः आपके अनुकूल है । आपने जिस कार्य के बारे में प्रश्न किया है, वह आपके अनुकूल है तथा शीघ्र ही सुसंवाद सुनने को मिलेगा । आप जिस तरीके से आगे बढ़ रहे हैं वह सही है ।


71 - गफलत व्यक्ति की भयंकर दुश्मन है । आप योग्य हैं, अनुभवी हैं, श्रेष्ठ हैं, सब कुछ होते हुये भी आप अकर्मण्य एवं आलसी हैं । इसलिए आप इतनी सफलता प्राप्त नहीं कर सकते जितनी होनी चाहिए । आलस्य को छोड़े दें तो आप शीघ्र ही अनुभव करेंगे कि आप पहले से ज्यादा सुविधाजनक स्थिति में हैं ।


72 - आपका प्रश्न धन से संबंधित है और आप चिंतित हैं कि किस प्रकार द्रव्योपार्जन हो, या जो मेरा पैसा रुका है, वह आयेगा या नहीं । लगभग यह या इसी प्रकार के प्रश्न हो सकते हैं । प्रश्न आपके अनुकूल है तथा द्रव्योपार्जन के कुछ नये स्रोत बनेंगे जिससे आप लाभदायक स्थिति में रहेंगे ।


73 - प्रश्न की दृष्टि से आप आने वाले समय में उलझनपूर्ण स्थिति में रहेंगे, तथा कुछ व्यावहारिक कठिनाइयां भी उपस्थित होंगी । अतएव आप शांति से इस समय को व्यतीत कर दें तो ज्यादा उचित रहेगा । हो सकता है कि अगले कुछ समय में व्यर्थ का व्यय हो जाए या परेशानियां बढ़ जायें या कोई घाटा दे जाये । आप सभी दृष्टियों से सतर्क रहिये ।


74 - आपका प्रश्न पत्नी या ससुराल या इसी से मिलते जुलते किसी विषय से संबंधित हो सकता है, पर आप चिंता न करें क्योंकि आपकी शंका निराधार है । आने वाले कुछ समय में आप इस पक्ष से लाभ उठा सकेंगे ।


75 - प्रश्न श्रेष्ठतम है । आप निश्चिंत रहिये कि कुछ ही समय में आपकी इस समस्या का समाधान हो जाएगा, साथ ही लाभ भी उठा सकेंगे । प्रश्न की दृष्टि से यही समय आपके अनुकूल है । आप प्रयत्न कीजिए, सफलता जयमाला लिये स्वागत हेतु उपस्थित है ।


76 - आने वाले कुछ ही महीनों के भीतर एक ऐसी योजना आपके सामने उपस्थित होगी जो आपके लिए तो लाभदायक होगी ही, आपके परिवार के लिए भी सुख वर्धक और श्रेष्ठ होगी । अतः जिस गति के साथ आप आगे बढ़ रहे हैं, उसी गति के आप अग्रसर होते रहें । समय आपके पक्ष में है ।


77 - यह प्रश्न द्वंदात्मक है अर्थात आप जिस विषय को लेकर चिंतित हैं वह संपन्न हो, ऐसे आसान फिलहाल दिखाई नहीं देते, इसलिए आने वाले समय में दो पक्षों के बीच पारस्परिक मतभेद उग्र होगा, कठिनाइयां बढ़ेंगी एवं समस्याओं से ग्रस्त होकर मानसिक परेशानियों में उलझना पड़ेगा । आपको आगाह किया जाता है कि आप सतर्क एवं सावधान रहें ।


78 - आप व्यर्थ में चिंता न करें क्योंकि कोई भी कार्य चमत्कार से ही संपन्न नहीं हो जाता । प्रत्येक कार्य के लिए कुछ न कुछ समय अपेक्षित है । अतः यदि आप धैर्य से प्रतीक्षा करें तो आप स्वयं अनुभव करेंगे कि कार्य आपके पक्ष में सिद्ध होता जा रहा है । उतावली का प्रदर्शन न करें ।


79 - आप अपनी उन्नति के बारे में चिंतित हैं या अपने से संबंधित किसी मसले को लेकर परेशान हैं । जहां तक प्रश्न का संबंध है, अभी आपकी कार्य सिद्धि में देरी है, और कुछ समय के बाद यदि आप प्रयत्न करें तो लाभ उठा सकते हैं । अधिकारियों के प्रति आदर भाव रखें ।


80 - आप लाभ - हानि के झूले में झूल रहे हैं और अनुभव कर रहे हैं कि क्या किया जाए? जहां तक प्रश्न का संबंध है, इस समय स्थिति आपके पक्ष में नहीं है । सावधानी से लेन - देन करें ।


81 - आपकी समस्या अर्थ से संबंधित है और चाहते हैं कि इस संबंध में जो भी विवाद है वह शांत हो जाए, या हल हो जाए । मगर प्रश्न की दृष्टि से आप उतावली न दिखायें, क्योंकि समय और स्थिति अपने आप आपके पक्ष में होती जा रही है, और ज्यों - ज्यों समय बीतेगा, आप ज्यादा लाभदायक स्थिति में रहेंगे ।


82 - आपने जो प्रश्न सोचा है, वह सिद्ध या सफल हो, इसमें संदेह है । क्योंकि अभी तक तो कई अड़चनें और बाधायें कार्य में हैं जिन्हें हल करना परमावश्यक है ।


83 - आपका प्रश्न व्यापार से संबंधित है, और आप व्यापार के हानि-लाभ के बारे में जानना चाहते हैं । आपका प्रश्न सफल है और शीघ्र ही आपको मनोवांछित सफलता मिलेगी ।


84 - आप प्रयत्न कीजिए और बिना हिचकिचाहट के प्रयत्न कीजिए । निश्चय ही आपके पक्ष में कार्य सिद्धि होगी तथा घर में प्रसन्नता एवं मंगलमय वातावरण बन सकेगा । प्रश्न सफल एवं उत्तम है ।


आप सभी को अपने जीवन में प्रश्नों का समाधान प्राप्त हो सके और कठिन रास्तों पर ही राह निकालना आ सके, ऐसी ही शुभेच्छा है ।


अस्तु ।

 

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अंक विद्या – भाग १
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