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गुप्त नवरात्रि और माला सिद्धि विधान-2

Updated: Sep 3, 2023

माला सिद्धि विधान


इस विधान के प्रयोग से जो माला आप सिद्ध करेंगे वह आपके पूरे जीवनभर काम आयेगी । आप किसी भी साधना में उस माला का प्रयोग कर सकते हैं, प्रत्येक बार साधना के पश्चात इस माला की ऊर्जा में उत्तरोत्तर वृद्धि ही होती है । ये माला तो एक सौभाग्य है और आगे आने वाली पीढ़ियों के लिए भी एक धरोहर है ।

  1. सर्वप्रथम पूजन स्थल को भली भांति स्वच्छ जल से साफ़ कर ले,और उत्तर दिशा की और मुख कर सके,ऐसे स्थान का चयन कर ले ।

  2. वस्त्र व आसन लाल रंग के होंगे ।

  3. सामने बाजोट पर भी लाल रंग का वस्त्र बिछा दें ।

  4. समय रात्रि का दूसरा प्रहर अर्थात १० बजे से ३ बजे के मध्य का होगा ।

  5. स्नान कर वस्त्र धारण कर अपने आसन पर बैठ जाएँ ।

  6. पूजन सामग्री में मुख्यतः कुंकुम मिश्रित १ किलो अक्षत (साबुत चावल), तेल का दीपक (जो भी आप पूजन के लिए प्रयुक्त करते हों), भोज पत्र या सफ़ेद कागज़ का टुकड़ा, रक्त पुष्प, ६ निम्बू, ४ नारियल, पान का पत्ता (रोज नया) और नहीं मिले तो पूजा की सुपारी, नया चाकू, कुंकुम, ९ इलायची, २७ लोंग, छोटे छोटे ९ लाल वस्त्र के रुमाल जैसे टुकड़े, ताम्बे का जल पात्र, दूध की मिठाई या मिश्री, कोई भी फल ।

  7. जिस माला को आप सिद्ध करना चाहते हैं (रुद्राक्ष, स्फटिक, हकीक सफ़ेद,पीला या लाल, मूंगा, कमलगट्टे की माला का प्रयोग करना बेहतर है) ।

  8. गुरु मंत्र जप करने के लिए अपनी गुरु माला का प्रयोग किया जाना उचित है । अर्थात सिद्ध करने के लिए अलग और गुरु मंत्र जप के लिए अलग माला का प्रयोग करना है । ये बात बार - बार बताना उचित नहीं होगा ।

बाजोट (इसे चौकी भी कहते हैं) पर गुरु चित्र, गुरु यन्त्र, गणपति,यन्त्र या चित्र की स्थापना कर, "" का पूर्ण रूप से ५ बार उच्चारण करें तथा सदगुरुदेव और भगवान गणपति का पूर्ण पंचोपचार विधि से पूजन करें । गुरु मंत्र की कम से कम ४ माला संपन्न करें और १ माला तांत्रोक्त गणपति मंत्र की संपन्न करें ।


गुरु मंत्र


।। ॐ परम तत्वाय नारायणाय गुरुभ्यो नमः ।।


तांत्रोक्त गणपति मंत्र


।। ॐ गणाध्यक्षो कृष्ण पिंग्लाक्षाय नमः ।।

OM GANADHYAKSHO KRISHN PINGLAKSHAAY NAMAH


तत्पश्चात सदगुरुदेव और भगवान गणपति से साधना विधान में सफलता के लिए प्रार्थना करें ।


अब कुंकुम से बाजोट के सामने भूमि पर एक मैथुन चक्र का निर्माण करे । इसके अलावा, ताम्बे की एक छोटी सी थाली बाजोट पर भी गुरु चित्र के सामने स्थापित करें और उसमें भी मैथुन चक्र का अंकन कर लें ।

मैथुन चक्र

अब माला को किसी अलग पात्र में शुद्ध जल से स्नान करवाकर और पोंछ कर उस थाली में स्थापित कर दें जिस में मैथुन चक्र अंकित है और जो बाजोट पर स्थापित है ।


अब ध्यान मंत्र का ५ बार उच्चारण करे –


अति सुललित वेशां हास्य वक्त्राम् त्रिनेत्राम,

जित जल्द सुकान्तिम् पट्ट वस्त्रां प्रकाशं ।

अभय वर कराढ्यां रत्न भूषाभि भव्यां,

सुर तरु ताल पीठे रत्न सिंहासनस्थाम् ।।


अब जो नया चाकू आपने रखा हुआ है उस पर कुंकुम का तिलक लगाकर निम्न मंत्र का २१ बार उच्चारण कर उसे अपने बायें पैर के आसन के नीचे दबा लें -


।। फ्रें फ्रें क्रों क्रों पशुन् गृहाण हुं फट् स्वाहा ।।

FREM FREM KROM KROM PASHUN GRIHAAN PHAT SWAHA


और इसके बाद गुरु माला से ही आद्यशक्तिमाँकामाख्या के निम्न महा मंत्र की ३ माला संपन्न करे -


।। त्रीं त्रीं त्रीं ।।


तदुपरांत भोजपत्र पर पूर्ण तंत्र साफल्य मंत्र कुंकुम से लिख कर भूमि पर लिखे त्रिकोण के मध्य जो बिंदु बना है उस पर स्थापित कर दें -


पूर्ण तंत्र साफल्य मंत्र


।। ॐ ह्रीं ऐं क्लीं क्रीं हुं हुं क्रीं क्रीं फट् ।।

OM HREENG AING KLEENG KREEM HUM HUM KREEM KREEM PHAT


अब एक नीम्बू को त्रिकोण के एक कोण में निम्न मंत्र बोलते हुए स्थापित कर दें । फिर मंत्र बोलते हुए दूसरा नीम्बू दूसरे त्रिभुज में स्थापित कर दें । इस प्रकार ६ निम्बुओं को ६ त्रिकोण में स्थापित कर दें ।

।। ॐ ऐं ह्रीं ह्सौ: त्रिपुरे अमृतार्णववासिनी शिवे शिवानन्यरुपिन्यै ते स्थापयामि नमः ।।

OM AIM HREEM HASOUH TRIPURE AMRITARNAVVAASINI SHIVE SHIVANANYARUPINYAI TE STHAPYAAMI NAMAH ।।


इसके बाद उस भोजपत्र का पूजन निम्न मंत्र बोलते हुए कुंकुम मिश्रित अक्षत द्वारा करें -


ॐ ऐं ह्रीं ह्सौ: त्रिपुरे अमृतार्णववासिनी शिवे शिवानन्यरुपिन्यै ते अक्षतान समर्पयामि नमः ।।


अब कुंकुम द्वारा उस भोजपत्र का पूजन निम्न मंत्र बोलते हुए करे –


ॐ ऐं ह्रीं ह्सौ: त्रिपुरे अमृतार्णववासिनी शिवे शिवानन्यरुपिन्यै ते कुंकुम समर्पयामि नमः ।।


अब पुष्प अर्पण करे –


ॐ ऐं ह्रीं ह्सौ: त्रिपुरे अमृतार्णववासिनी शिवे शिवानन्यरुपिन्यै ते पुष्पं समर्पयामि नमः ।।


अब धुप-दीप द्वारा पूजन करे –


ॐ ऐं ह्रीं ह्सौ: त्रिपुरे अमृतार्णववासिनी शिवे शिवानन्यरुपिन्यै ते धूपं दीपं दर्शयामि नमः ।।


अब नैवेद्य या फल द्वारा पूजन करे –


ॐ ऐं ह्रीं ह्सौ: त्रिपुरे अमृतार्णववासिनी शिवे शिवानन्यरुपिन्यै ते फलं-नैवेद्यम समर्पयामि नमः ।।


अब १ नारियल को अर्पित करे –


ॐ ऐं ह्रीं ह्सौ: त्रिपुरे अमृतार्णववासिनी शिवे शिवानन्यरुपिन्यै ते नारिकेल समर्पयामि नमः ।।


अब जिस माला को सिद्ध करना है, उसे पात्र में से उठाकर और हाथ में लेकर निम्न मंत्र का ११ बार उच्चारण करते हुए घुमाते जाये अर्थात जैसे माला करते हुए हम उंगलियों और अंगूठे का प्रयोग करते हैं, वैसे ही करें ।


माले माले महामाले सर्व तत्त्व स्वरूपिणी । चतुर्वर्गस्त्वयि न्यस्त स्तस्मंमे सिद्धिदा भव ।।


अब उसी माला से १ माला मंत्रजप निम्न मंत्र का करे –


।। ॐ ह्रीं श्रीं अक्षमालायै नमः ।।


OM HREEM SHREEM AKSHMAALAAYAI NAMAH ।।


तत्पश्चात निम्न मंत्र का जप १ माला उसी माला से करे, इस मंत्र के प्रयोग से आपकी माला पूर्ण तांत्रोक्त माला बन जाती है -


।। ॐ सर्व माला मणि माला सिद्धि प्रदात्रयि शक्ति रुपिण्यै नमः ।।

OM SARVMAALAA MANIMAALAA SIDDHI PRADAATRAYI SHAKTI RUPINYAI NAMAH


अब उस माला को वापस उसी पात्र में स्थापित कर दें, और उसका पूजन करें । माला का पूजन रक्त पुष्प, नारियल, पान का पत्ता (रोज नया) और नहीं मिले तो पूजा की सुपारी, १ इलायची, ३ लौंग और नैवेद्य से करें । जब आप सामग्री अर्पित कर रहे हों तब निम्न मंत्र का उच्चारण करते हुए करें और मंत्र के अंत में जिस सामग्री को आप अर्पित कर रहे हों, उस सामग्री का नाम लेकर समर्पयामि नमः कहे ।


उदाहरण –

ॐ ह्रीं श्रीं अक्षमालायै नमः रक्तपुष्पं समर्पयामी ,नारिकेल समर्पयामी .....आदि आदि


इसके बाद उसी माला पर कुंकुम मिश्रित अक्षत निम्न मंत्र बोलते हुए चेतना क्रिया संपन्न करे,ये मंत्र कम से कम २० मिनट या १०८ बार बोलते हुए अक्षत के दाने अर्पित करते जाना है -


।। ॐ ऐं ह्रीं श्रीं अं आं इं ईं ऋम् ऋम् लृं लृं एं ऐं ओं औं अं अ: कं खं गं घं ङ चं छं जं झं ञं टं ठं डं ढं णं तं थं दं धं नं पं फं बं भं मं यं रं लं वं शं षं सं हं क्षं ।।


OM AING HREENG SHREENG AM AAM IM EEM RIM RRIM LRM LRIM EM AIM OM OUM AM AH KAM KHAM GAM GHAM INGAM CHAM CHHAM JAM JHAM INYAM TAM THAM DAM DHAM NNAM TAM THAM DAM DHAM NAM PAM PHAM BAM BHAM MAM YAM RAM LAM VAM SHAM SHHAMSAM HAM KSHAM ।।


इसके बाद माला को निम्न मंत्र से प्रणाम करें और उन पर पुष्प अर्पित करे –


ॐ त्वं माले सर्वदेवानां सर्व सिद्धिप्र्दा मता । तें सत्येन में सिद्धिं देहि मातर्नमोSस्तूते ।।


इसके बाद इसी माला से पूर्ण तंत्र साफल्य मंत्र की ५ माला जप करे ।


पूर्ण तंत्र साफल्य मंत्र


।। ॐ ह्रीं ऐं क्लीं क्रीं हुं हुं क्रीं क्रीं फट् ।।

OM HREENG AING KLEENG KREEM HUM HUM KREEM KREEM PHAT


और अंत में सद्गुरु चरणों में मंत्र जप अर्पित कर दें । यही क्रम अंतिम दिवस तक अर्थात 3 फरवरी तक रहेगा...याद रखिये नीम्बू मात्र पहले दिन स्थापित करने हैं, नारियल पहले और अंतिम दिवस स्थापित करना है । क्रम समाप्त होने पर माला को उसी पात्र में रख दें और लाल वस्त्र के टुकड़े से ढंक दें, दूसरे दिन दूसरे वस्त्र से, इसी प्रकार ९ दिनों तक नित्य नए वस्त्र से ढांकना है...और पुराने वाले को अलग रख देना है । 3 फरवरी को सभी सामग्री (माला और भोजपत्र को छोड़कर) बाजोट पर पर बिछे वस्त्र में बांधकर सदगुरुदेव से पूर्ण सफलता की प्रार्थना करते हुए किसी वीरान स्थान में रख दें और फर्श को धो या पोंछ लें...हां, याद रखिये, मैथुन चक्र, मात्र पहले दिन ही भूमि और पात्र में बनेगा, उसे नित्य बनाने की जरूरत नहीं है । भोजपत्र को स्वच्छ जल में विसर्जित कर दें ।


मैं मात्र यही कहूंगा कि ऐसा सौभाग्य किसी - किसी का ही होता है कि सही अवसर हो और गुह्यतम क्रियाओं की प्राप्ति हो, आप सभी को इस सौभाग्यशाली पर्व का पूर्ण लाभ प्राप्त हो, यही प्रार्थना और कामना है मेरी अपने प्राणाधार के श्री चरणों में ।


इस पूरे साधना विधान की pdf copy को आप यहां से डाउनलोड़ कर सकते हैं । इससे आपको प्रिंट करने में सुविधा होगी ।



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अस्तु ।

 

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