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हे सदगुरुदेव! तेरे रंग हजार 🙏

Updated: Aug 7


कितनी ही बार हम इस सवाल से दो - चार हो ही जाते हैं कि क्या करुं, कौन सी साधना करुं, ऐसा क्या करुं कि सदगुरुदेव की कृपा मुझ पर बरसने लग जाए और मेरा जीवन सफल हो जाए । जो उत्साही साधक होते हैं वो फटाफट 15 - 20 साधना करके तुरंत सदगुरुदेव की तरफ देखने लगते हैं कि देखो गुरुजी, मैंने कितनी सारी साधनायें कर डालीं हैं । अब तो मुझे सिद्धि मिल ही जानी चाहिए ।


अब गुरुजी तो इस बात पर कुछ कहने से रहे । वो तो बस मुसकुरा देते हैं । साधक बेचारा परेशान, फिर से नयी साधना में लग जाता है कि चलो काली मईया की साधना से तो कुछ मिला नहीं, चलो अब भैरव बाबा की साधना करते हैं । अब भैरव बाबा भी बिज़ी निकले तो साधक बेचारा और परेशान कि, यहां से भी कुछ नही मिला । चलो भगवान कृष्ण की साधना करते हैं; कहते हैं कि भगवान कृष्ण तो जगतगुरु हैं, पक्का मेरा उद्धार तो वही करेंगे । पर कृष्ण तो कह गये थे कि तू कर्म किये जा और फल की इच्छा मत कर । तो यहां भी फल नहीं मिला ....

करते - करते सालों गुजर गये पर मुकाम नहीं मिला .... ।


यही बात है न मेरे भाई .... ;-)


अच्छा एक बार और भी है कि, समस्या बस यहीं खत्म नहीं हो जाती है । दरअसल समस्या तो यहां से शुरु होती है । होता क्या है कि हम सबको अपने बाहुबल पर बहुत भरोसा होता है और एक (ही) चीज हम सब सोचते हैं कि जब साधनाओं से सब कुछ संभव है तो हम भी अपना अभीष्ट प्राप्त करके ही रहेंगे, साधना करेंगे और जीवन में ये प्राप्त करेंगे, वो प्राप्त करेंगे, फलाना करेंगे, ढिमका करेंगे ... bla bla bla bla....


किसी - किसी को तो 5 - 7 साल में सदगुरुदेव की कृपा से अक्ल आ जाती है कि आखिर माया के पार कैसे जाना है लेकिन, कोई - कोई तो 20 - 20 साल बाद भी भटकता ही रहता है । इनमें वो लोग भी हैं जो सदगुरुदेव से दीक्षित हैं और वो भी हैं जो 15 - 20 साल पहले ही त्रिमूर्ति गुरुदेव से दीक्षा लिये थे ।


अभी कल ही एक गुरुभाई ने प्रश्न किया कि उनको समझ नहीं आता है कि क्या करें । वो ये भी कहते हैं कि करने को तो 51 लाख जप, 24 घंटे में लगातार बैठकर कर सकते हैं लेकिन वो करें तो करें क्या?


चूंकि प्रश्न महत्वपूर्ण है इसलिए मात्र खिंचाई करने से काम नहीं चलेगा । इसका उत्तर देना बहुत आवश्यक है क्योंकि बहुत से गुरुभाई इस अवस्था से होकर गुजरते ही हैं । उनको मार्गदर्शन की बहुत आवश्यकता होती है । सदगुरुदेव ने अपने अलग - अलग प्रवचन में जो कुछ कहा है, वह मैं यहां पर संकलित कर रहा हूं । आशा है कि इन गुरुभाई के प्रश्न का उत्तर उनके प्रश्नानुसार ही मिल जाएगा -


सदगुरुदेव तो सिद्धाश्रम में हैं तो हम उनकी सेवा कैसे कर सकते हैं ?


ये आपसे किसने कहा कि सदगुरुदेव केवल सिद्धाश्रम में ही रह सकते हैं? जो सर्वव्यापी, अविनाशी और अनंत हैं उनको आप केवल सिद्धाश्रम तक ही सीमित कर देना चाहते हैं?

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