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सदगुरु कृपा विशेषांकः जीवन एक संतुलन

भाग 2 - समस्या के प्रति दृष्टिकोण और समाधान


हम लोग कई बार समस्या और समाधान विषय पर चर्चा कर चुके हैं लेकिन एक बात कहने का मौका कभी नहीं मिला - एक तथ्य कि हम अपनी परेशानियों से परेशान जरूर होते हैं लेकिन वास्तविकता में स्वयं मां भगवती और परमपिता परमेश्वर दोनों ही इन परेशानियों के माध्यम से हमारा भौतिक और आध्यात्मिक उत्थान करना चाहते हैं । लेकिन समस्या ये है कि हम उनके संकेतों को समझ ही नहीं पाते और माया के आवेग में कभी इधर और कभी उधर डोलते रहते हैं । कहना गलत न होगा लेकिन हम अपनी परेशानियों से शायद ही कभी फायदा उठा पाते हों । शायद इसीलिए शास्त्रों में गुरु की महिमा का बखान किया गया है लेकिन गुरु भी आपकी मदद तब ही कर सकेंगे जब आप गुरु के प्रति समर्पित होते हुये भी स्वयं में एक प्रखर व्यक्तित्व बनने का हौसला रखते हों ।


सदगुरुदेव महाराज की आज्ञा और प्रेरणा से ही ऐसे लेख लिखने का सौभाग्य मिलता है जो हमारे व्यक्तित्व को निखरने में मदद करते हैं ।


अभी हाल ही में एक दिलचस्प दृश्य देखने को मिला । आप लोगों ने टैक्टर - ट्रॉली तो देखे ही होंगे । उन पर मिट्टी या ईंट लादकर ले जाते हुये भी देखा ही होगा । ट्रैक्टर सच में बहुत ताकतवर होते हैं और बहुत ज्यादा वजन भी उठाकर ले जा सकते हैं ।


लेकिन इतना ताकतवर ट्रैक्टर भी अगर कीचड़ में फंस जाए तो उसकी अपरिमित ताकत भी व्यर्थ हो जाती है । दरअसल कीचड़ स्वयं तो कुछ नहीं करती, लेकिन कीचड़ की एक क्षमता लाजवाब है - वह अपने चंगुल में फंसी किसी भी चीज की पकड़ जमीन से खत्म कर देती है । कीचड़ में फंसने के बाद ट्रैक्टर के पहिये भी जमीन पर पकड़ बरकरार नहीं रख पाते हैं और नतीजतन ट्रैक्टर के पहिये अपनी ही जगह पर घूमने लग जाते हैं ।


कुछ याद आया?


हम लोग साधक हैं । सदगुरुदेव प्रदत्त मंत्रों की ताकत भी अपरिमित है और जब एक साधक मंत्रों का प्रयोग करता है तो उसकी तुलना आप एक ट्रैक्टर की ताकत से आसानी से कर सकते हैं । हालांकि, जब तक जीवन में समस्या नहीं आती है तब तक एक साधक प्रबल वेग से जीवन में सफलता प्राप्त करता हुआ चला जाता है । लेकिन जैसे ही माया रूपी कीचड़ में प्रवेश होता है तब साधक का समस्त बल व्यर्थ हो जाता है । उसकी कोई भी विद्या काम नहीं करती है ।


मैंने देखा है कि ज्यादातर साधक समस्याग्रस्त होते ही संशय में पड़ जाते हैं कि ऐसा उनके साथ कैसे हो गया । उनको ये भी समझ नहीं आता है कि जब साधना कर ही रहे हैं तो समस्या का समाधान हो क्यों नहीं रहा है । आखिर उनकी विद्या काम क्यों नहीं आ रही है?


ऐसे ही न जाने कितने सवाल होते हैं जो किसी भी साधक का पीछा छोड़ने को तैयार ही नहीं होते हैं ।


मैंने बहुत सारे गुरुभाई - बहनों को ये भी कहते हुये सुना है कि हमने तो दीक्षा लेने में ही लाखों रुपये खर्च कर दिये, लेकिन फायदा कुछ नहीं हुआ । कुछ लोग तो सदगुरुदेव को ही उल्टा सीधा कहने लगते हैं । सोशल मीडिया का जमाना है तो कुछ गुरुभाई जैसे कि विरल पटेल (जो सदगुरुदेव के ऑडिओ - वीडिओ पूरी दुनिया में भेजते हैं), वो भी ऐसे - ऐसे सवाल उठाने लगते हैं जो मेरी नजर में बिलकुल भी उचित नहीं हैं जैसे कि जो कार्य बड़े गुरुजी के जमाने में होते थे वह गुरु त्रिमूर्ति नहीं करवाते हैं । और भी न जाने क्या - क्या कहते हैं लोग तो, लिस्ट तो बहुत बड़ी है लेकिन आज के लेख का उद्देश्य किसी की आलोचना करना नहीं है, बल्कि समाधान प्राप्त करने की दिशा में एक कदम बढ़ाना है ।

और समाधान प्राप्त करना चाहते हैं तो एक सत्य यह भी जान लीजिए कि ये सब नजरिये का खेल है । और, यहां सिर्फ समस्या की ही बात नहीं हो रही है, हो सकता है कि आपके मानस में कोई विशेष इच्छा हो । तो, चर्चा का विषय कुछ भी हो सकता है, लेकिन तरीका यही काम करेगा ।

आप कह सकते हैं कि जीवन में धन की कमी है या विवाह नहीं हो रहा है तो ये सब नजरिये का खेल कैसे हो गया? आप ये भी कह सकते हैं कि अगर हम अपने जीवन में नजरिया बदल लें तो क्या जीवन में धन प्राप्त हो जाएगा या विवाह हो जाएगा या नौकरी लग जाएगी या शत्रुओं से मुक्ति मिल जाएगी इत्यादि, इत्यादि ।


तो मेरे प्रिय भाई/बहन, मैं पूर्ण विश्वास के साथ कहता हूं कि अगर आप सत्य में नजरिया बदल लेंगे तो आपकी साधना से ही आपकी समस्या का हल हो जाएगा ।


अब आप ये भी कह सकते हैं कि मैं तो पूर्ण रुप से शांत रहता हूं, मेहनत करता हू, निस्वार्थ सेवा भी करता हूं, साधना भी करता हूं .... और क्या चाहिए नजरिया बदलने के लिए? क्या इतना पर्याप्त नहीं हो सकता? क्या इतना करने से हमारे जीवन की समस्या का समाधान नहीं हो सकता? हम तो सदगुरुदेव के प्रति पूर्ण रूप से समर्पित भी हैं, समय - समय पर शक्तिपात दीक्षा भी लेते रहते हैं । तो, आखिर क्या कारण हैं कि जीवन में समस्या आने पर हम पूर्ण रूप से असहाय क्यों हो जाते हैं?


इसका जवाब जानना चाहते हैं तो वापस ट्रैक्टर-ट्रॉली वाली चर्चा पर आना होगा ।


कल्पना कीजिए कि ट्रैक्टर पूरी क्षमता से चल रहा है और ट्रॉली भी पूरी तरह से भरी हुयी है । अब अगर रास्ते में कीचड़ आ जाये या ट्रैक्टर (चिकनी) मिट्टी में धंस जाए तो क्या होगा? ऐसी स्थिति में ट्रैक्टर पूरी ताकत लगाकर भी मिट्टी से बाहर नहीं निकल सकता । उसके बड़े वाले पहिये अपनी ही जगह पर घूमते रहेंगे ।


दिलचस्प बात तो ये है कि ट्रैक्टर जितनी ज्यादा ताकत लगायेगा, मिट्टी में उतना ही गहरा धंसता जाएगा । यही हाल एक साधक का भी होता है, समस्या में घिरने पर बाहर निकलने के लिए वह जितनी ज्यादा क्षमता से मंत्र बल का प्रयोग करता है, उतना ही वह समस्या में घिर जाता है ।

सवाल ये भी है कि ट्रैक्टर के उदाहरण से क्या किसी साधक की तुलना करना उचित है । एक बार को अगर मान भी लिया जाए कि तुलना करना उचित है तो फिर ये सवाल भी लाजमी है कि आखिर ऐसा होता क्यों है?


इस सवाल का जवाब तो और भी आसान है - मां भगवती और परमपिता परमेश्वर अपनी किसी भी संतान को कष्ट में नहीं देख सकते लेकिन चूंकि ये कर्म जगत है, इसलिए हर कर्म का हिसाब तो चुकाना ही पड़ता है । काल शक्तियां पूरी क्षमता से आपको कष्ट भोगने के लिए बाध्य कर देती हैं । विडंबना यहां ये है कि गुरु चाहते हैं कि आप इस कष्ट से बाहर आ जाओ, और आप भी चाहते हैं कि आप इस कष्ट से बार आ जाएं लेकिन आप गुरु की कही हुयी बात ही नहीं मानते हैं, उनकी आज्ञा का पालन ही नहीं करते हैं, जैसे गुरु समझाना चाह रहे हैं, वैसे आप समझने का प्रयास ही नहीं कर रहे हैं और कभी - कभी तो ऐसा भी होते हुये देखा है कि गुरु की आज्ञा का उल्लंघन करके, अपने मनमाफिक समाधान में लगे रहते हैं जिसका परिणाम वही रहता है जो पहले से होना निर्धारित था । यानी जैसे काल शक्तियां चाहती थीं, वैसा ही हुआ ।


तो करना क्या चाहिए?


तरीके तो बहुत सारे हो सकते हैं लेकिन मेरी राय में सबसे पहले ट्रॉली खाली कर दो और जो पहिये अपनी ही जगह पर घूम रहे हैं, उसके नीचे सूखी मिट्टी भर दीजिए । और जरूरत पड़े तो थोड़ा सा धक्का लगा दीजिए । ट्रैक्टर बाहर निकल आयेगा ।


अब आप कहेंगे कि इसका आपकी समस्या से क्या संबंध है? तो एक बार इसे भी देख लीजिए भाई -


ट्रैक्टर = आपकी साधना का बल

ट्रॉली = आपका जीवन

ट्रॉली में भरी मिट्टी या ईंट = आपके जीवन की इच्छायें, वासनायें, न्यूनतायें

सूखी मिट्टी का घूमते पहियों के नीचे प्रयोग = अपनी साधना शक्ति का अपने वातावरण को साधने में प्रयोग

ट्रॉली को पीछे से धक्का = गुरु की आज्ञा का पालन


मां भगवती और परमपिता परमेश्वर तो चाहते ही थे कि इन इच्छाओं, वासनाओं से भरी हुयी आपकी ये जीवन रूपी ट्रॉली खाली हो जाए, इसीलिए आपके जीवन में समस्यायें दी जाती हैं ताकि इन समस्याओं की आड़ में आपकी भौतिक और आध्यात्मिक उन्नति को अग्रसर किया जा सके ।

कमाल की बात तो ये है कि हम अपनी इच्छाओं और वासनाओं के मोह में इतना ग्रसित रहते हैं कि कीचड़ रूपी समस्या में फंसे रहने को तो तैयार हैं लेकिन इन इच्छाओं का परित्याग नहीं कर पाते हैं ।


तो जब तक ग्रह, नक्षत्र आपके पक्ष में रहते हैं तब तक आप अपने जीवन की इच्छायें, वासनायें या न्यूनताओं को ढोते हुये चल सकते हैं लेकिन जैसे ही ग्रह दशा विपरीत होती है और जीवन में समस्याओं का आगमन होता है तो आपके जीवन रूपी ट्राली भी कीचड़ में फंस जाती है । और आपका साधना रूपी टैक्टर पूरे क्षमतावान होते हुये भी आपको इस स्थिति से बाहर नहीं निकाल पाता ।


आपकी सारी विद्या, साधना और दीक्षा भी निष्फल हो जाती है तो किस कारण से - सिर्फ एक ही कारण है कि हम अपने जीवन से अपनी इच्छायें, वासनायें और न्यूनताओं को जीवन रूपी ट्रॉली से हटाने से मना कर देते हैं ।


तो साधना करने से कुछ नहीं होगा क्या?


बिलकुल होगा और, मैं तो कहता हूं कि जीवन का कोई भी काम गुरु मंत्र की मात्र 5 माला प्रतिदिन करने से ही हो जाएगा । लेकिन होगा तब, जब ट्रॉली खाली हो जाएगी और थोड़ा सा धक्का ट्रॉली को भी लगायेंगे । कहने का तात्पर्य है कि आप जो भी साधना करते हैं, सबसे पहले उसे पूरी क्षमता से ट्रॉली खाली करने के काम पर लगा दीजिए । अर्थात, आपकी साधना का उद्देश्य आपकी अपनी इच्छाओं की समाप्ति की तरफ हो जाना चाहिए । इसके अलावा अगर मन में भय है, क्लेश है, रोष है, क्रोध है, या फिर चाहे कुछ भी है, आपका प्राथमिक उद्देश्य इनका निवारण ही होना चाहिए ।

 

बस इतनी सी ही बात है और, ये केवल एक प्रक्रिया की बात है । तो, जब तक हम प्रक्रिया को समझेंगे नहीं और प्रक्रिया का पालन किये बिना अंध-भक्त बनकर साधना करते रहेंगे, तब तक कुछ नहीं होने वाला । इसीलिए अगर आप सदगुरुदेव महाराज से दीक्षा प्राप्त करके, मंत्र प्राप्त कर लिये हैं तो बहुत अच्छी बात है, लेकिन ये केवल सिक्के का एक पहलू है, दूसरा पहलू प्रयोगात्मक है और ऊपर लिखी प्रक्रिया का पालन करेंगे तो शक्तिपात की यही ऊर्जा आपके जीवन की समस्याओं को आपके जीवन से बाहर ऐसे निकाल देगी जैसे कोई दूध में से मक्खी निकाल देता है ।


 

आयुर्वेद और हमारा जीवन


समयाभाव के कारण पिछली कई पोस्ट में आयुर्वेद से जुड़ी कोई चर्चा नहीं हो पा रही थी लेकिन अब गर्मियां आ रही हैं तो समय रहते कुछ चीजों पर चर्चा करना उचित रहेगा ।


हम लोगों ने गैनोडर्मा मशरूम के गुणों से युक्त कई प्रोडक्ट इस्तेमाल करके देखे हैं, सब एक से बढ़कर लाजवाब हैं । दरअसल, DXN ने हमारी जरूरतों के बहुत सारे प्रोडक्ट बना दिये हैं और सबको गैनोडर्मा के गुणों से भरपूर कर दिया है । इसी वजह से इनके प्रोडक्ट न सिर्फ हमारे स्वास्थ्य के लिए बेहतर बन गये हैं बल्कि हमारे बजट पर भी सकारात्मक प्रभाव डालते हैं ।


कल्पना कीजिए कि अगर किसी वजह से आपको हॉस्पीटल में भर्ती होना पड़ जाए तो ये हॉस्पीटल मात्र एक घंटे में आपका कितना बिल बना सकते हैं, इसका लगभग सबको अंदाजा ही होगा । लेकिन अगर यही पैसा हम अपनी सेहत पर खर्च करें और वह भी धीरे - धीरे तो मेरे अनुभव में हॉस्पीटल तक जाने की नौबत नहीं पड़ती और सामान्य दवाओं से भी काम चल जाता है ।


इसके मूल में केवल 2 चीजें काम करती हैं -

  1. हमारी जीवनशैली

  2. हमारा खान पान


एक स्वस्थ जीवनशैली हमको चुस्त-दुरुस्त रखने में मदद करती है और बेहतर खान - पान हमारी रोग प्रतिरोधक क्षमता को बनाये रखता है । बेहतर खान - पान हमारे शरीर की कोशिकाओं को नया रखने में भी मदद करता है । और, ऐसा करने के लिए बहुत ज्यादा खर्च नहीं करना होता है, केवल कुछ चीजों को आप अपने भोजन में शामिल कर लीजिए ।


ऐसा ही एक प्रोडक्ट है Cordyceps Coffee, इसका नियमित इस्तेमाल आपके शरीर को स्वस्थ रखने में मदद करता है । दरअसल Cordyceps एक जड़ी बूटी का नाम है जो उत्तराखंड में प्रचुर मात्रा में मिलती है और इसको कीड़ा जड़ी भी कहते हैं । DXN ने इस Cordyceps के गुणों का प्रयोग करके एक बेहतरीन कॉफी तैयार की है जो न सिर्फ स्वाद में अच्छी है बल्कि सेहत के लिए भी शानदार है । आप भी एक बार प्रयोग करके अवश्य देंखें, मैं यहां इसकी लिंक शेयर कर रहा हूं -


(DXN Cordyceps Coffee)


Cordyceps इस्तेमाल करने के संभावित फायदे -

  • antitumor अर्थात ट्यूमर के रोग में भी ये फायदा कर सकती है ।

  • anti-diabetic अर्थात शुगर के रोगी भी इसे ले सकते हैं ।

  • anti-inflammatory अर्थात ये शरीर में सूजन को कम करती है ।

  • antimicrobial अर्थात ये शरीर में संक्रमण होने से रोकती है ।

  • inhibiting platelet aggregation अर्थात ये शरीर के अंदर रक्त का थक्का बनने से रोकती है ।

  • hypolipidemic अर्थात इसके इस्तेमाल से शरीर में चर्बी का जमा होना कम होने लगता है ।

  • analgesic अर्थात ये शरीर में अक्सर होने वाले दर्द पर भी सकारात्मक प्रभाव डालती है ।

  • immunomodulatory अर्थात ये आपके रोग प्रतिरोधक तंत्र को मजबूत करते हैं ।


मेडिकल साइंस में निरंतर शोध होते रहते हैं और शोधकर्ताओं का कहना है कि कॉर्डीसेप्स में पाये जाने वाले Cordycepin में विभिन्न समस्याओं का समाधान करने की क्षमता है जैसे -

  • osteoporosis

  • arthritis

  • cardiovascular diseases

  • diabetes

  • malaria


अगर आप कॉर्डीसेप्स से जुडे मेडीकल साइंस के मूल लेख पढ़ना चाहें तो यहां पर पढ़ सकते हैं


मैं समझ सकता हूं कि DXN के उत्पाद थोड़े महंगे अवश्य हैं लेकिन अगर इनके इस्तेमाल से होने वाले फायदे देखे जाएं तो ये खर्च कहीं नहीं ठहरता । अगर 4 - 5 व्यक्तियों का परिवार कॉफी का एक पैकेट इस्तेमाल करता है तो भी कम से कम 1 - 2 महीने चल जाता है तो कीमत के हिसाब से इसका प्रयोग मुनासिब ही है । मैंने इसको सालों साल इस्तेमाल करते देखा है और वास्तव में ही शानदार पाया है लेकिन, मैं यहां आपको केवल सुझाव दे सकता हूं ।


 

आप सब अपने जीवन में इच्छित उद्देश्य की प्राप्त कर सकें, एक स्वस्थ जीवन जी सकें और जीवन में ऊर्ध्वगति प्राप्त कर सकें, ऐसी ही सदगुरुदेव महाराज के श्रीचरणों में विनम्र निवेदन करता हूं ।


अस्तु ।


 

1 commentaire

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Invité
17 mars
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Jay Sadgurudev🙏

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