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कुंजिकास्तोत्र

Updated: Aug 8

कुंजिकास्तोत्र जैसा कि नाम से ही स्पष्ट है कि ये यह स्तोत्र कुंजी की तरह ही काम करता है । सदगुरुदेव ने इस कुंजिकास्तोत्र को बताते हुये स्पष्ट किया है कि भगवान शिव ने माता पार्वती को यह मंत्र बताते हुए कहा था कि अगर साधक को किसी प्रकार का कोई मंत्र ज्ञान नहीं हो या दुर्गा सप्तशती का ज्ञान नहीं तो तो वह केवल कुंजिका स्तोत्र का एक बार पाठ कर ले, तब भी उसके सारे कार्य पूर्ण होते ही हैं।


मेरा मानना है कि जो लोग ज्यादा व्यस्त रहते हैं और इस आपाधापी से भरे हुये जीवन में साधना, जप, तप के लिए अधिक समय नहीं निकाल पाते हैं, तो उनके लिए यह कुंजिकास्तोत्र एक वरदान की तरह ही है । इसका मात्र 1, 11 या 21 बार पाठ करना पर्याप्त रहता है । जो पाठ करने में कठिनाई महसूस करते हैं, उनको इस स्तोत्र को सदगुरुदेव की आवाज में अपने घर में अवश्य बजाना चाहिए और उसका श्रवण करना चाहिए ।


इससे भी जीवन में भौतिक और आध्यात्मिक उन्नति का रास्ता प्रशस्त होता ही है ।


जो साधक हैं, उनके लिए भी एक संदेश है कि कभी-कभी हम भ्रम में उलझ जाते हैं, कि उक्त मन्त्र सही या नहीं या कहीं कीलित तो नहीं? किन्तु क्या आप एक बात जानते हैं कि जो भी साधक दुर्गा सप्तशती के कवच, अर्गला एवं कीलक का नवरात्रि में पाठ करते हैं या सदैव करते रहते हैं, उनके तो सारे मन्त्र स्वयं ही उत्कीलित हो जाते हैं, और सिद्ध कुञ्जिका तो वैसे भी मंत्रों को सिद्ध करने की चाबी है भाइयों…… :)


मेरे प्यारे भाइयों बहनों ! वैसे भी प्रत्येक कार्य और मार्गदर्शन सदगुरुदेव के द्वारा ही संचालित हो रहा है तो फिर कैसी शंका। हमें तो बस साधना करनी है…. और बढ़ना है उच्चता की ओर, और गुरुदेव की तरफ प्रत्येक कदम उनसे प्यार करके साधना करके ही बढ़ाया जा सकता है न...


आप तो बस साधना करिये …. :) और मुस्कुराइए कि आप निखिल शिष्य हैं और उनकी ही क्रिया शैली के एक अंग, एक अंश, जिसके जुड़ते ही शायद कोई कृति न निर्मित होती हो, अतः आप बस अपने पूर्ण समर्पण, प्यार और स्नेह के साथ जुड़ने की ही क्रिया कीजिये…… :)

सिद्धकुञ्जिकास्तोत्रम्


शिव उवाच


शृणु देवि प्रवक्ष्यामि कुञ्जिकास्तोत्रमुत्तमम् ।

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