लक्ष्मी प्राप्ति के व्यावहारिक विकल्प - 2
- Rajeev Sharma
- Aug 5, 2020
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Updated: Aug 7
लक्ष्मी प्राप्ति को लेकर किए गये प्रयासों के संदर्भ में अधिकतर लोगों के मन में एक प्रश्न अवश्य रहता है, "पता नहीं सफल हो पाऊंगा या नहीं?"
बहुत बार ये बात सही भी हो जाती है क्योंकि हमारे मन की चिंतायें हमारी कार्य क्षमता पर प्रभाव डालती ही हैं । अब आप इसे प्रारब्ध कहिये या भाग्य हीनता । कई बार प्रयास करने के बाद भी उतनी सफलतायें नहीं मिल पाती हैं जितनी कि हम अपेक्षा करते हैं ।
दरअसल होता क्या है कि हमारे जीवन का गणित, ग्रह चाल का एक खेल मात्र है । हम लोगों ने इस बात को अष्टक वर्ग ज्योतिष की श्रंखला में समझा था कि जीवन के गणित को मात्र कुछ अंकों में व्यक्त किया जा सकता है । और, इन अंकों के माध्यम से हम विधाता को उस लेख को भी पढ़ पाने में सक्षम हो जाते हैं जो अभी तक हमारे लिए अज्ञात था । मगर, विधाता के लिखे को समझने और जीवन में अपना अभीष्ट प्राप्त करने के बीच में कुछ दूरी होती है । जितना जरुरी इस दूरी को समझना है, उतना ही आवश्यक है कि हम इस दूरी को पाटने का विधान क्या है उसे भी समझ सकें ।
उदाहरण के लिए, अगर हम अपने अष्टक वर्ग के माध्यम से ये जान पाते हैं कि निकट भविष्य में कैसा समय रहने वाला है, तो क्यों न हम उस आने वाले समय की तैयारी अभी से शुरु कर दें । आखिर, यही तो ज्योतिष की सार्थकता है जो आपको भविष्य का ज्ञान कराकर आपको इस बात के लिए भी तैयार करती है कि भई, अब तैयारी का समय आ गया है ।
यही वह समय होता है जब हम अपने जीवन को संवारने के लिए साधनाओं का आश्रय लेते हैं । सदगुरुदेव के पिछले कई दशकों में प्रत्येक शिविर की रिकॉर्डिंग वरिष्ठ गुरुभाइयों के पास मौजूद थीं, उन्हीं रिकॉर्डिंग में से चुने हुये हीरक खंड हम आपके सामने लेकर के आते हैं ।
आज जिस विषय की चर्चा यहां पर की जा रही है वह भाग्योदय से संबंधित है । भाग्योदय का मतलब है कि हमारे जीवन की बाधाओं का अंत हो और, हम जो भी प्रयास करें उसमें हमें सफलता प्राप्त होने लग जाए ।
बाधाओं का अंत हो, इसके लिए हमें जीवन में सर्व बाधा निवारण प्रयोग को अपनाना चाहिए । सदगुरुदेव ने एक शिविर में इस बाधा निवारण मंत्र की दीक्षा और मंत्र प्रदान किया था । इस रिकॉर्डिंग को यहां पोस्ट किया जा रहा है । आप चाहें तो इसे अपने फोन या कम्प्यूटर में डाउनलोड़ करके नित्य प्रतिदिन इसका श्रवण कर सकते हैं । आपको कुछ खास नहीं करना है, बस जैसा सदगुरुदेव रिकॉर्डिंग में निर्देशित कर रहे हैं, वैसा आप करते जाएं और सर्व बाधा निवारण दीक्षा को प्रतिदिन ग्रहण करें । ऐसा करने से भी जीवन में बाधाओं का शमन होने लगता है ।