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लक्ष्मी प्राप्ति के व्यावहारिक विकल्प - 3

Updated: Aug 7

लक्ष्मी प्राप्ति के असंख्य विधान हैं पर सबके लिए कोई एक ही विधान कारगर होगा, ऐसा कहने के लिए एक मूल वाक्य याद रखना चाहिए -


।। गुरु कृपा ही केवलम, गुरु कृपा ही केवलम, गुरु कृपा ही केवलम ।।


अर्थात, इस समस्त संसार में केवल मात्र गुरु कृपा से ही वह सब कुछ प्राप्त किया जा सकता है जो प्रारब्ध में भी नहीं लिखा गया है । गुरु अगर चाहें तो पलक झपकने से पहले ही आपको पूर्णता प्रदान कर सकते हैं । अब आप खुद ही सोचिए कि पलक झपकने में कितना समय लगता है - एक सेकंड से भी कम । और इतनी अवधि में ही गुरु आपको पूर्ण भी कर सकते हैं । तो जो गुरु आपको एक क्षण में पूर्ण कर सकते हैं, उनके लिए आपको जीवन में लक्ष्मी जी का अवतरण करवाना कौन सी बड़ी बात है ।


आज हम इसी विषय पर चर्चा करेंगे कि किस प्रकार से गुरु तत्व के माध्यम से लक्ष्मी तत्व को अपने जीवन में समाहित किया जा सकता है ।

गुरु मंत्र के माध्यम से लक्ष्मी प्राप्ति


सदगुरुदेव ने बहुत कृपा करके जिस गुरु मंत्र को प्रदान किया है, दरअसल वही चाबी है । हमें ये तो पता है कि गुरु मंत्र के 16 अक्षर विभिन्न प्रकार के आयामों से संबंधित हैं और जब हम गुरु मंत्र की 16 माला का जप करते हैं तो प्रत्येक वर्ण की आवृत्ति 108 बार पूरी हो जाती है । यहां तक तो सभी परिचित हैं । पर इस बात से कम ही लोग परिचित हैं कि गुरु मंत्र ही लक्ष्मी मंत्र में बदल जाता है जब उसे लक्ष्मी जी के बीज मंत्र से आबद्ध कर दिया जाता है । इस प्रकार से उस मंत्र से आप न सिर्फ गुरु मंत्र जप कर रहे होते हैं बल्कि वही साधना आपकी लक्ष्मी साधना में भी बदल जाती है ।


यहां एक महत्वपूर्ण तथ्य यह भी है कि जब हमें किसी और माध्यम से लक्ष्मी प्राप्त होती है तो वह स्थायी नहीं होती । लक्ष्मी तो चंचला है और वह एक जगह कभी नहीं रुक सकती । पर जब इसी साधना को गुरु मंत्र के माध्यम से किया जाता है तो आने वाली लक्ष्मी की प्रकृति स्थायी होती है । दरअसल वह लक्ष्मी जी नहीं हैं, साक्षात सदगुरुदेव ही आपके जीवन में लक्ष्मी का रुप रखकर आते हैं ।


लक्ष्मी जी का बीज मंत्र है -


।। श्रीं ।।

shreem


यूं तो इस बीज मंत्र को ही जपते रहें तो भी लक्ष्मी जी प्रसन्न रहती हैं पर जब इसी बीज मंत्र को गुरु मंत्र के साथ संपुट कर दिया जाता है तो उसकी तो बात ही कुछ और है और, वह मंत्र इस प्रकार है -

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