सौन्दर्य बोध विशेषांक - भाग ६ (अप्सरा/यक्षिणी हृदय कीलन क्रिया)
- Rajeev Sharma
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यंत्र कीलन
सौंदर्य बोध विशेषांक के माध्यम से अब तक कई महत्वपूर्ण और गोपनीय तथ्यों को आपके सामने रखा गया है । मुझे आशा ही नहीं, उम्मीद भी है कि आप धीरे - धीरे ही सही, लेकिन अप्सरा साधनाओं के महत्वपूर्ण उपकरणों को साधनात्मक पद्धति से तैयार कर रहे होंगे ।

जिन भाई - बहनों ने अप्सरा साधनाओं के निमित्त कामाक्षी माला का निर्माण करके, यंत्र का उत्थापन, पंचदशी यंत्र निर्माण इत्यादि संपन्न कर लिया है, वह अब आगे की प्रक्रिया भी शुरु कर सकते हैं । इनमें मुख्य है यंत्र का कीलन करना - मूल रूप से यह प्रक्रिया २ चरणों में संपन्न होती है -
१. अप्सरा/यक्षिणी हृदय कीलन
२. शक्ति यंत्र कीलन
ये दोनों ही प्रक्रियायें इतनी महत्वपूर्ण हैं कि अगर आप प्रत्यक्षीकरण की चाह न रखें और केवल मात्र ऐश्वर्य और धन प्राप्ति की चाह रखें, तो केवल कीलन विधान को संपन्न करने मात्र से ही जीवन में धन प्राप्ति के अनेक स्रोत बनने लग जाते हैं । प्रत्यक्षीकरण एक अलग ही स्तर मांगता है प्रत्येक साधक से । इसलिए अगर आप प्रत्यक्षीकरण करना चाहते हैं तो बहुत ही गंभीरता के साथ इन साधनाओं के प्रत्येक पहलुओं को आत्मसात करना चाहिए । अगर केवल धन प्राप्ति ही उद्देश्य है तो वह इन साधनाओं के माध्यम से रास्ता प्रशस्त हो जाता है ।
अप्सरा/यक्षिणी हृदय कीलन क्रिया
जिस अप्सरा या यक्षिणी की साधना आप करने वाले हैं, उसके नाम का संपुट रति - अनंग कामाक्षी शक्ति मंत्र में करके ५ माला जप कर लें । इस हेतु आप कामाक्षी माला का ही प्रयोग करें । कामाक्षी माला के निर्माण का विधान पहले ही प्रकाशित किया जा चुका है ।
ये विधान मूल साधना की पूर्व रात्रि को ही हो जाना चाहिए । समय मध्य रात्रि का रहे ।
विधिः सामने तेल का दीपक प्रज्वलित कर लें, किसी पात्र में अप्सरा मंडल को स्थापित करके उसका पंचोपचार पूजन कर लें । केसर मिश्रित खीर और पान का भोग लगायें और रति - अनंग कामाक्षी शक्ति मंत्र की ५ माला जप संपन्न कर लें -
।। हृीं क्लीं ऐं ब्लूं स्त्रीं (अप्सरा/यक्षिणी का नाम) देव्यै स्त्रीं ब्लूं ऐं क्लीं हृीं ।।
Hreem Kleem Aim Bloom Streem (Apsara/Yakshini) Devyai Streem Bloom Aim Kleem Hreem
शुरुआत की मालाओं में ऐसा अनुभव हो सकता है जैसे आपकी जीभ तालू से चिपक गयी हो । लेकिन चिंता की आवश्यकता नहीं है । मंत्र जप पूरा होते - होते जीभ का कीलन भी खुल जाता है । आपकी कामाक्षी माला और अप्सरा मंडल का सायुज्यीकरण होने से अप्सरा/यक्षिणी हृदय कीलन की इस क्रिया को बहुत ही सहजता से किया जा सकता है ।
शक्ति यंत्र कीलन क्रिया
जिस अप्सरा या यक्षिणी की आप साधना करना चाहते हैं, उसका चित्र या विग्रह आपके पास अवश्य होना चाहिए । इससे ध्यान में अनुकूलता मिलती है । चित्र आप स्वयं भी बना सकते हैं या गुरु प्रदत्त जो गुरु ने स्वयं अपने हाथ से बनाया हो, उसका प्रयोग करना चाहिए । प्रिंट के चक्कर में न पड़ें ।
इसी शक्ति (अप्सरा या यक्षिणी) का आपको कीलन भी करना होता है जो परम गोपनीय रही है । ये तो वरिष्ठ गुरुभाईयों का प्रेम है जो उन्होंने विस्तार से इसका विवेचन समझाया था । कीलन की इस क्रिया में भोजपत्र या सफेद कागज पर त्रिगंध से शक्ति का लघु चित्र या यंत्र बनाया जाता है । अगर अप्सरा या यक्षिणी का चित्र बनाते हैं तो चित्र के मध्य, मूल मंत्र भी लिखा जाता है (जैसे उदाहरण रूप में नीचे वाले चित्र में लिखा गया है) ।
अगर आपने यंत्र बनाया है तो उसके मध्य में मंत्र नहीं लिखना है ।
अब उस चित्र या यंत्र के चारों ओर गोलाकार में मंत्र लिखना रहता है ।




